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​"मेरा परिवार, मेरा अन्नदाता": सीएम डॉ. मोहन यादव ने किसानों के नाम लिखा भावुक संदेश, बोले— 'आपका सुख ही मेरा सुख'

भोपाल | मध्यप्रदेश की सियासत में 'अन्नदाता' सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास की आत्मा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24 अप्रैल को सोशल मीडिया के जरिए प्रदेश के किसानों के नाम एक बेहद भावुक और विश्वास से भरा संदेश साझा किया। उन्होंने न केवल किसानों को नमन किया, बल्कि स्पष्ट कर दिया कि उनकी सरकार के लिए 'किसान की खुशहाली' ही सर्वोपरि है।
​मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा— "बिना किसान के राज्य का विकास असंभव है।"
​📜 संदेश के मुख्य अंश: एक नज़र में
​डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों का लेखा-जोखा जनता के सामने रखा:
​गेहूं खरीदी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: किसानों की मेहनत का सम्मान करते हुए गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है।
​स्लॉट बुकिंग और उपार्जन: अब सप्ताह में 6 दिन गेहूं की खरीदी होगी (शनिवार को अवकाश नहीं)। स्लॉट बुकिंग की तारीख को भी 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दिया गया है।
​मुआवजे पर बड़ा फैसला: भू-अर्जन के मामलों में अब किसानों को उनकी जमीन के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा।
​बोनस का तोहफा: उड़द की खेती को बढ़ावा देने के लिए समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल की बोनस राशि दी जाएगी।
​💡 'किसान कल्याण वर्ष' और तकनीकी क्रांति
​मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस वर्ष को 'किसान कल्याण वर्ष' के रूप में मना रही है। इसके तहत कुछ क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं:
​बिजली में आत्मनिर्भर किसान: 'कृषक मित्र योजना' के तहत 90% सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप दिए जा रहे हैं। अब किसानों को रात के अंधेरे में नहीं, बल्कि दिन की रोशनी में सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिलेगी।
​मिल्क कैपिटल बनेगा एमपी: प्रदेश को दूध उत्पादन में नंबर-1 बनाने के लिए 1752 नई दुग्ध समितियां बनाई गई हैं। दूध उत्पादकों को ₹1600 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
​उर्वरक की सुलभता: युद्ध जैसी वैश्विक स्थितियों के बावजूद राज्य में यूरिया और अन्य खाद का पर्याप्त भंडारण (5.90 लाख मीट्रिक टन) सुनिश्चित किया गया है।
​❤️ "पूरा मध्यप्रदेश मेरा परिवार है"
​भावुक होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "जब से मैंने पद की शपथ ली है, पूरा मध्यप्रदेश मेरा परिवार है। आपका सुख मेरा सुख है और आपका दुख मेरा दुख।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन को राज्य की प्रगति का आधार बताया और भरोसा दिलाया कि प्रदेश की सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।
​"सच्चा वादा और पक्का काम हमारी सरकार का संकल्प है। जब खेत से कारखाने तक समृद्धि आएगी, तभी 'विकसित भारत 2047' का सपना सच होगा।" — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री
​निष्कर्ष: मुख्यमंत्री का यह संबोधन केवल सरकारी आंकड़ों का जाल नहीं, बल्कि एक सीधा संवाद है जो बताता है कि मध्यप्रदेश की आने वाली तस्वीर में किसान सबसे सशक्त भूमिका में होगा। 'अन्नदाता' के प्रति यह सम्मान और समर्पण निश्चित रूप से राज्य को कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

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