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झारखंड में नौकरी को लेकर उठे सवाल, युवाओं में बढ़ी नाराज़गी

झारखंड:
राज्य में सरकारी नौकरियों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि “दरवाज़ा खुला है, आओ और झारखंड में नौकरी ले लो”—और इस बयान के जरिए सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि झारखंड के लाखों स्थानीय युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले अभ्यर्थी यहां की सरकारी नौकरियों में चयनित हो रहे हैं। खासकर CDPO और अन्य उच्च पदों पर बाहरी उम्मीदवारों के चयन को लेकर नाराज़गी जाहिर की जा रही है।

क्या हैं मुख्य आरोप?

कहा जा रहा है कि झारखंड में पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू होने के कारण अन्य राज्यों के उम्मीदवार यहां आकर्षित हो रहे हैं।

सरकारी नौकरी में ट्रांसफर-पोस्टिंग, पैरवी और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भी वजह बताया जा रहा है।

ग्रुप A और B स्तर की परीक्षाओं में स्थानीय अभ्यर्थियों का चयन प्रतिशत 50% से कम होने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

उठते सवाल

पोस्ट में यह भी पूछा गया है कि जब परीक्षा के सिलेबस में झारखंड की भाषा, संस्कृति और सामान्य ज्ञान शामिल है, तो फिर स्थानीय युवाओं का चयन कम क्यों हो रहा है?
क्या यह तैयारी की कमी है या फिर चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं?

नियोजन नीति पर बहस

इस मुद्दे ने एक बार फिर स्थानीय बनाम बाहरी (Local vs Outsider) और नियोजन नीति की बहस को हवा दे दी है।
कुछ लोगों का कहना है कि अगर यही स्थिति ग्रुप C और D की नौकरियों में होती, तो विरोध और ज्यादा तीव्र होता।

जनता की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर लोग दो हिस्सों में बंटे नजर आ रहे हैं—

एक वर्ग इसे प्रतिभा और प्रतियोगिता का परिणाम बता रहा है

वहीं दूसरा वर्ग इसे नीति और सिस्टम की विफलता मान रहा है

सरकार की स्थिति

फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक रूप से और गरमा सकता है।

आपकी क्या राय है?
क्या यह टैलेंट की जीत है या सिस्टम में गड़बड़ी? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।

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