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नरवाई जलाने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन सख्त

नरवाई जलाने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन सख्त

भितरवार में नरवाई जलाने वाले 70 व्यक्तियों पर लगाया 4.45 लाख का जुर्माना

पर्यावरण संरक्षण और मृदा की उर्वरता को बचाने के लिए ग्वालियर जिला प्रशासन ने नरवाई (फसल अवशेष) जलाने वालों के विरुद्ध अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के कड़े निर्देशों के अनुपालन में, भितरवार तहसील में कानून का उल्लंघन कर खेतों में आग लगाने वाले 70 व्यक्तियों पर 4 लाख 45 हजार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया गया है।
यह बड़ी कार्रवाई एसडीएम भितरवार श्री राजीव समाधिया द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। इस दल में एसएडीओ, जनपद पंचायत सीईओ, तहसीलदार और नायब तहसीलदार जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। प्रशासन ने पटवारी, सचिव और आरएईओ के माध्यम से प्रत्येक गांव का सूक्ष्म निरीक्षण कर दोषियों की पहचान की है।
इन गांवों में पकड़े गए दोषी
जांच दल ने सघन अभियान चलाकर जिन ग्रामों में नरवाई जलाने के गंभीर मामले पकड़े गए हैं उनमें ग्राम
रही, डोगरपुर, बनियातौर, हरसीखेड़ा, भितरवार, आदमपुर, धोवट, चर्रोली, बसई, गोहिंदा, बनहेरी एवं घाटमपुर शामिल है।इन सभी गाँवो में चिन्हित 70 उल्लंघनकर्ताओं के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से जुर्माना लगाया गया है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फसल अवशेष जलाना न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह धरती और पर्यावरण के लिए "धीमा जहर" है। आग
से भूमि के मित्र सूक्ष्म जीव और जैविक कार्बन नष्ट हो जाते हैं, जिससे उपजाऊ जमीन बंजर होने लगती है।इससे उत्पन्न होने वाला धुआं वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ाता है, जो जनस्वास्थ्य के लिए घातक है।
जिला प्रशासन ने किसानों से पुनः पुरजोर अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय नरवाई प्रबंधन के आधुनिक व वैकल्पिक तरीके अपनाएं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि पर्यावरण और मृदा स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध भविष्य में और भी कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
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CM Madhya Pradesh

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