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पलामू के चक की बेटी प्रीति ने रच दिया इतिहास, जैक 10वीं बोर्ड में झारखंड में आठवां स्थान

JAC Matric Result: पलामू जिले के मनातू प्रखंड के चक गांव की बेटी प्रीति कुमारी ने अपनी मेहनत और लगन से वह कर दिखाया है, जो बड़े शहरों के छात्रों के लिए भी चुनौती होता है. झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) की मैट्रिक परीक्षा 2026 में प्रीति ने 97.80 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे राज्य में आठवां स्थान प्राप्त किया है. इस उपलब्धि से न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम रोशन हुआ है.
सफलता का श्रेय शिक्षकों और माता-पिता को
प्रीति कुमारी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने विद्यालय के शिक्षकों और माता-पिता को दिया है. उसने बताया कि पीएमश्री स्तरोन्नत उच्च विद्यालय चक में पढ़ाई के दौरान उसे शिक्षकों का पूरा मार्गदर्शन मिला. साथ ही परिवार का सहयोग और प्रेरणा भी उसकी सफलता का मुख्य आधार रहा. प्रीति का कहना है कि बिना समर्थन और सही दिशा के यह उपलब्धि संभव नहीं थी.

आईएएस बनकर देश सेवा करने का सपना
प्रीति का लक्ष्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं है, बल्कि वह भविष्य में सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करना चाहती है. उसने साफ कहा कि वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती है. उसका मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे व्यक्ति अपने जीवन के साथ-साथ समाज और देश को भी बेहतर बना सकता है. उसकी यह सोच अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा है.

साधारण परिवार से असाधारण सफलता
प्रीति के पिता संजय कुमार मालाकार एक किसान हैं और माता ललिता देवी गृहिणी हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद प्रीति ने अपनी पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी. उसके माता-पिता ने बताया कि वह बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और मेहनती रही है. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया.

विद्यालय ने जताई गर्व की भावना
विद्यालय के प्रधानाध्यापक विनय शुक्ला ने प्रीति की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि वह एक मेधावी और अनुशासित छात्रा रही है. पढ़ाई के प्रति उसकी गंभीरता और समर्पण ने उसे यह मुकाम दिलाया है. विद्यालय के सभी शिक्षकों ने उसकी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है.

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से उभरती नई पहचान
पलामू का मनातू क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल प्रभावित इलाका रहा है. खासकर चक गांव झारखंड और बिहार की सीमा पर स्थित होने के कारण वर्षों तक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से जूझता रहा. लेकिन अब यहां के बच्चे शिक्षा को अपना हथियार बनाकर नई पहचान गढ़ रहे हैं. प्रीति की सफलता इस बदलाव का जीवंत उदाहरण है.

शिक्षा के जरिए बदल रही इलाके की तस्वीर
प्रीति जैसी होनहार छात्राएं इस बात का प्रमाण हैं कि यदि सही दिशा और मेहनत हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती. आज चक गांव के बच्चे कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को संवारने में जुटे हैं. यह बदलाव पूरे समाज के लिए सकारात्मक संकेत है.
गुदड़ी का लाल बनी प्रीति
प्रीति कुमारी ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर यह साबित कर दिया है कि सफलता संसाधनों पर नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और समर्पण पर निर्भर करती है. झारखंड में आठवां स्थान हासिल कर उसने यह संदेश दिया है कि छोटे गांवों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं. उसे गुदड़ी का लाल कहना बिल्कुल उचित है.

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