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सरकारी लापरवाही का शिकार हुए बेजुबान जीव, कर्मचारियों की उदासीनता ने ली बेजुबानों की जान : परमार

भिवानी। बेजुबान जीवों की सेवा और उनके संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट खर्च करने वाली सरकारी डायल 1962 एंबुलेंस सेवा अब हरियाणा के भिवानी में महज एक सफेद हाथी साबित हो रही है। कर्मचारियों की कथित लापरवाही और ड्यूटी के प्रति घोर उदासीनता के कारण जिले में बेजुबान जानवरों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी के विरोध में गौरक्षा दल भिवानी का अनिश्चितकालीन धरना राजकीय वेटनरी पॉलीक्लीनिक के सामने वीरवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। धरने के दूसरे दिन गौरक्षकों का आक्रोश सातवें आसमान पर दिखा। प्रदर्शनकारियों ने विभाग के लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति को बिगड़ता देख पशुपालन विभाग के उप निदेशक रविंद्र सहरावत ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाने और समझौता करवाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत सिरे नहीं चढ़ पाई तथा गौरक्षकों ने अपना धरना जारी रखा। इस मौके पर गौरक्षा दल भिवानी के प्रधान संजय परमार ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में एंबुलेंस कर्मचारियों की ड्यूटी दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक तय है, लेकिन धरातल पर सच्चाई डराने वाली है। हमने हाल ही में बीमार जीवों के लिए 7 केस दर्ज करवाए थे। बार-बार फोन किए गए, मिन्नतें की गईं, लेकिन संवेदनहीन कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे। इस लापरवाही की कीमत तीन बेजुबानों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। दो कुत्तों और एक बछड़े ने इलाज न मिलने के कारण सडक़ पर तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। गौरक्षा दल ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है। प्रधान संजय परमार ने चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती और एंबुलेंस सेवा को सुचारू रूप से सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक यह धरना अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा।

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