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कार्यशाला विश्वविद्यालय में महिला सशक्तिकरण, वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम-लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ अनिल

खानपुर कलां, 23 अप्रैल।
भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां में महिला वैज्ञानिक नेतृत्व को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए साप्ताहिक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर ट्रेनिंग एंड रिसर्च (एनआईटीटीटीआर), चंडीगढ़ के सहयोग से “डेवलपमेंट ऑफ साइंटिफिक लीडरशिप इन वीमेन थ्रू एडवांस्ड मैटेरियल्स रिसर्च एंड कैरेक्टराइजेशन” विषय पर आयोजित यह कार्यशाला 24 अप्रैल तक चलेगी।कार्यशाला की अध्यक्षता फैकल्टी ऑफ साइंसेज के डीन प्रो. सुनील सांगवान ने कर रहे है। कार्यशाला के दौरान आज विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। नेशनल फिजिक्स लेबोरेटरी दिल्ली के साइंटिस्ट डॉ. परवीन सैनी ने “सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट वाया साइंटिफिक इंटरवेंशंस एंड इंडिविजुअल सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना और प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक जिम्मेदारी निभाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन के आधुनिक तरीकों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की।दूसरे सत्र में मिरांडा हाउस नई दिल्ली की सहायक प्राध्यापक डॉ अनुष्का पाल ने “होलिस्टिक वेस्ट मैनेजमेंट” विषय पर बोलते हुए कचरा प्रबंधन के समग्र दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि केवल तकनीकी समाधान ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और व्यवहार में बदलाव भी स्वच्छ एवं सतत पर्यावरण के लिए आवश्यक हैं।वहीं तीसरे सत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर ट्रेनिंग एंड रिसर्च (एनआईटीटीटीआर), चंडीगढ़ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने “साइंस एंड टेक्नोलॉजी इन एंशिएंट इंडिया” विषय पर व्याख्यान देते हुए प्राचीन भारत में विज्ञान एवं तकनीक की समृद्ध विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा आज के आधुनिक विज्ञान के लिए भी प्रेरणा स्रोत है।कार्यशाला के अंतिम सत्र में पहुंचे विवि के निदेशक जन सम्पर्क लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ अनिल बल्हारा ने कहा की समग्र रूप से यह कार्यशाला विश्वविद्यालय में महिला सशक्तिकरण, वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है।कार्यशाला की कोऑर्डिनेटर डॉ शीला मलिक ने बताया कि कार्यशाला में विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को एडवांस्ड मैटेरियल्स के निर्माण, उनकी विशेषताओं के अध्ययन (कैरेक्टराइजेशन) तथा आधुनिक उपकरणों के उपयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही वैज्ञानिक अनुसंधान में नैतिकता, नवाचार और नेतृत्व कौशल के विकास पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।फोटो कैप्शन :-01 विवि के निदेशक जन सम्पर्क लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ अनिल बल्हारा का स्वागत करते आयोजक प्रो सुनील सांगवान व डॉ शीला मलिक। 

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