SIR के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम गायब: लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला?
जो चुनाव आयोग कभी मुसलमानों के नाम तक सही से वोटर लिस्ट में नहीं लिख पाया, उसे अपने काम पर इतना भरोसा है कि उसने देशभर में करोड़ों वोटरों के नाम एक झटके में काट दिए।
अगर किसी सीट पर एक वोट से जीत-हार का फैसला होता है, और वहां कई वोटरों के नाम बाद में सही होकर लिस्ट में जुड़ते हैं, तो उस सीट की ज़िम्मेदारी कौन लेगा? क्या वहां दोबारा चुनाव होगा?
ये SIR के नाम पर भाजपा की नफरती सोच को सत्ता पर कब्ज़ा करने का रास्ता बनाया जा रहा है। ये भारत पर लोकतांत्रिक तरीके से कब्ज़ा करने की साज़िश भी हो सकती है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप जैसी विदेशी ताकतों का भी हाथ हो सकता है।
भारत की जनता जितनी जल्दी हिंदू-मुसलमान छोड़कर इस बात को समझ जाए, देश के लिए उतना ही अच्छा है। वरना “मैं देश नहीं बिकने दूंगा” का नारा देकर सब कुछ बेच दिया जाएगा, और जनता के हाथ सिर्फ “बाबा जी का ठुल्लू” ही आएगा।