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भीषण गर्मी में सेहत का रखें ख्याल: फार्मासिस्ट अशफाक अंसारी ने दी खान-पान में सावधानी बरतने की सलाह

गढ़वा: प्रदेश में लगातार बढ़ रहे तापमान और भीषण गर्मी ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ऐसे में लू और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से बचने के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। स्थानीय फार्मासिस्ट अशफाक अंसारी ने आम जनमानस के लिए स्वास्थ्य संबंधी विशेष सलाह जारी की है, जिसमें उन्होंने खान-पान और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करने पर जोर दिया है।
​पानी की कमी न होने दें
​अशफाक अंसारी ने बताया कि गर्मी के मौसम में शरीर से पसीने के रूप में काफी मात्रा में तरल पदार्थ बाहर निकल जाता है। इसकी भरपाई के लिए दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं। प्यास न लगने पर भी थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहना चाहिए। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, बेल का शरबत और छाछ का सेवन शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने में मददगार होता है।
​खान-पान में बरतें ये सावधानियां
​उन्होंने खान-पान को लेकर निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
​हल्का और ताजा भोजन: गर्मी में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए सुपाच्य और हल्का भोजन ही करें। बासी भोजन से बचें, क्योंकि गर्मी में खाना जल्दी खराब होता है जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है।
​मौसमी फलों का सेवन: तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसे फलों का अधिक सेवन करें, जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है।
​मसालेदार और तली चीजों से परहेज: अधिक मिर्च-मसाले, तेल और जंक फूड के सेवन से शरीर में गर्मी बढ़ती है, इसलिए इनसे बचना चाहिए।
​धूप से बचाव है जरूरी
​फार्मासिस्ट अंसारी ने सलाह दी कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक, जब धूप सबसे तेज होती है, अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो सिर को कपड़े या टोपी से ढंककर रखें और सूती व ढीले कपड़े पहनें।
​दवाइयों का रखें विशेष ध्यान
​एक फार्मासिस्ट के तौर पर उन्होंने यह भी आगाह किया कि कुछ विशेष बीमारियों (जैसे बीपी या शुगर) की दवाइयां ले रहे मरीज अपनी मर्जी से खुराक न बदलें और दवाइयों को ठंडे व सूखे स्थान पर ही स्टोर करें, क्योंकि अत्यधिक तापमान से दवाओं की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
​निष्कर्ष: अशफाक अंसारी ने अंत में कहा कि यदि किसी को अत्यधिक थकान, सिरदर्द, चक्कर आना या तेज बुखार जैसे लक्षण महसूस हों, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर डॉक्टर से सलाह लें। सतर्कता ही बचाव है।

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