logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

गढ़वा: बिना एनओसी और खाद्य लाइसेंस के चल रहीं दर्जनों मीट दुकानें, नियमों की उड़ रही धज्जियां

गढ़वा। शहर में इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर चिकन और मटन की दुकानों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। गढ़वा जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 60-70 ऐसी दुकानें हैं, जिनके पास न तो नगर परिषद की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) है और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति।
​नियमों का उल्लंघन और स्वास्थ्य पर खतरा
​जांच में सामने आया है कि शहर के कई प्रमुख स्थानों, जैसे संकट मोचन मंदिर और गोविंद प्लस टू विद्यालय के पास भी मांस की दुकानें संचालित हो रही हैं। नियमों के अनुसार, किसी भी धार्मिक स्थल या शिक्षण संस्थान से मीट दुकान की दूरी कम से कम 100 मीटर होनी चाहिए, लेकिन यहाँ इसका पालन नहीं किया जा रहा है। खुले में मांस बेचे जाने और गंदगी के कारण स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
​सादे कागज पर मिली अनुज्ञप्ति?
​हैरानी की बात यह है कि जिले में जिन 32 दुकानों (5 मटन और 27 चिकन) को खाद्य सुरक्षा विभाग ने लाइसेंस दिया है, उनमें से कई ने वार्ड सदस्यों से सादे कागज पर लिखवाकर अनुमति प्राप्त कर ली है, जो पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है। स्थानीय प्रशासन द्वारा हाल ही में उंचरी मोहल्ले में एक अवैध बूचड़खाने को सील किया गया है, जिसके बाद अब अन्य अवैध दुकानों पर भी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
​क्या कहते हैं नियम (गाइडलाइन्स):
​सरकार और जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अनुसार मीट दुकान संचालन के कड़े नियम हैं:
​अनिवार्य दस्तावेज: स्थानीय निकाय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी जरूरी है।
​दुकान की बनावट: दुकान की ऊंचाई कम से कम 3 मीटर होनी चाहिए, दरवाजे स्वतः बंद होने वाले हों और उनमें काले शीशे लगे होने चाहिए।
​स्वच्छता: मांस को खुले में लटकाना मना है। फर्श पक्का और फिसलन रहित होना चाहिए।
​औजार: मीट काटने के लिए केवल स्टेनलेस स्टील के चाकू का उपयोग होना चाहिए।
​स्पष्ट जानकारी: दुकान पर 'झटका' या 'हलाल' मांस का स्पष्ट उल्लेख होना अनिवार्य है।
​अधिकारियों का रुख
​जिला खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (डीएफएसओ) दीपश्री ने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि सभी दुकानदार स्थानीय अथॉरिटी और प्रदूषण बोर्ड से एनओसी लेकर ही संचालन करें। गाइडलाइन का पालन नहीं करने वाली दुकानों को चिन्हित कर बंद किया जाएगा और उन पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

0
0 views

Comment