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बमठी गांव में गुलदार का आतंक: 60 वर्षीय महिला को बनाया शिकार, ग्रामीणों में आक्रोश


पौड़ी गढ़वाल, 23 अप्रैल 2026 (विशेष संवाददाता):
जनपद पौड़ी गढ़वाल के मुख्यालय से सटे बमठी गांव में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। एक गुलदार (तेंदुआ) ने 60 वर्षीय महिला पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद गांव में मातम का माहौल है, वहीं ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 6 बजे महिला अपने घर के पास खेतों में चारा-पत्ती लेने गई थी। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उस पर हमला कर दिया। महिला के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके की ओर दौड़े, लेकिन तब तक गुलदार उसे घसीटकर जंगल की ओर ले जा चुका था।
कुछ देर बाद ग्रामीणों ने तलाश अभियान चलाया और काफी खोजबीन के बाद महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद किया। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में गुलदार का आतंक लंबे समय से बना हुआ है। आए दिन मवेशियों के साथ-साथ अब इंसानों पर भी हमले बढ़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग हर महीने ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है।

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों ने वन विभाग और जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध जताते हुए जल्द से जल्द गुलदार को पकड़ने या मारने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई है। अधिकारियों ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और गुलदार की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। साथ ही, ग्रामीणों से सतर्क रहने, अकेले जंगल या खेतों की ओर न जाने और समूह में ही बाहर निकलने की अपील की गई है।

इस दुखद घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में वन्यजीव-मानव संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रशासन प्रभावी कदम नहीं उठाता, तब तक इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।

बमठी गांव की यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक चेतावनी भी है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन और वन विभाग इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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