logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

अपने उसूलों पर खड़ा रहना ही इंसान की असली ताकत है।

“जैसे साइकिल को खड़ा करने के लिए स्टैंड की ज़रूरत होती है, वैसे ही इंसान को भी अपनी बातों पर खड़े रहने के लिए उसूलों, हिम्मत और मकसद की ज़रूरत होती है। साइकिल बिना स्टैंड के चल सकती है, लेकिन खड़ी नहीं हो सकती; वैसे ही इंसान बिना उसूलों के भी जी सकता है, लेकिन ज़िंदगी में स्थिर नहीं रह सकता।” विचार बहुत गहरे और मतलब वाले हैं। साइकिल और स्टैंड का उदाहरण देकर इंसान के कैरेक्टर के बारे में एक बड़ी सच्चाई बताई गई है। उसूल ही वह बुनियाद हैं जो इंसान को भीड़ से अलग करती हैं और उसे एक पहचान देती हैं। इस विचार के कुछ ज़रूरी पहलू: स्थिरता: जैसा आपने कहा, बिना स्टैंड के साइकिल गिर जाती है, वैसे ही जिस इंसान की ज़िंदगी में कोई नियम या उसूल नहीं होते, वह बुरे समय या लालच के आगे झुक जाता है। चरित्र की मज़बूती: उसूलों पर टिके रहना आसान नहीं है। इसके लिए हिम्मत चाहिए, क्योंकि कभी-कभी इंसान सच्चे रास्ते पर चलते हुए अकेला रह जाता है। मकसद की अहमियत: अगर ज़िंदगी में कोई बड़ा मकसद हो, तो उसूल अपने आप ज़िंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। चलना (ज़िंदगी जीना) तो सबको आता है, लेकिन जिसके उसूल होते हैं, वही सिर ऊँचा करके खड़ा होना (आत्म-सम्मान के साथ जीना) जानता है। यह आज के ज़माने में बहुत काम का है, जहाँ लोग अक्सर फ़ायदे के लिए अपने उसूल बदल लेते हैं। ये विचार एक खास संदर्भ में लिखे गए हैं; ये ज़िंदगी का एक निजी अनुभव है।
🍳*हरबंस सिंह, एडवाइजर* 🙏🏻 शहीद भगत सिंह एसोसिएशन पंजाब +91-8054400953,

0
24 views

Comment