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गढ़वा में अवैध बालू पर सख्ती: एक महीने में 1500 से 5000 पहुंची कीमत, विकास कार्य ठप

गढ़वा। जिले में अवैध बालू खनन पर प्रशासन द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई के बाद बालू की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। पिछले एक महीने के भीतर बालू की कीमत 1500 रुपये प्रति ट्रैक्टर से बढ़कर 5000 रुपये तक पहुंच गई है। कीमतों में अचानक आए इस उछाल ने न केवल आम जनता की जेब पर बोझ डाला है, बल्कि जिले में चल रही कई विकास योजनाओं और निर्माण कार्यों की गति को भी रोक दिया है।
​आम जनता और मजदूरों पर दोहरी मार
​बालू की आसमान छूती कीमतों और इसकी अनुपलब्धता के कारण सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। कई लोग जो अपने घरों का निर्माण या मरम्मत करवा रहे थे, उन्हें बजट बिगड़ने के कारण काम बीच में ही रोकना पड़ा है। निर्माण कार्य धीमा होने से दिहाड़ी मजदूरों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
​प्रशासनिक कार्रवाई का असर
​स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले महीने तक बालू का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था, जिससे कम दाम पर बालू आसानी से उपलब्ध हो जाता था। लेकिन जैसे ही प्रशासन ने अवैध खनन पर रोक लगाई, बाजार में बालू की आपूर्ति घट गई और कीमतों में सीधा 3500 रुपये तक का इजाफा देखा गया।
​क्यों हो रही है बालू की कमी?
​जिले में बालू संकट का एक मुख्य कारण बालू घाटों की समय पर नीलामी न हो पाना है। प्रशासन की ओर से लगातार टेंडर निकाले जाने के बावजूद कोई भी संवेदक (Contractor) सामने नहीं आ रहा है। नीलामी न होने के कारण वैध तरीके से बालू का उठाव नहीं हो पा रहा है, जिसका फायदा उठाकर कुछ लोग चोरी-छिपे ऊंचे दामों पर बालू बेच रहे हैं।
​जल्द होगा समाधान: खनन पदाधिकारी
​मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला खनन पदाधिकारी राजेंद्र उरांव ने कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बालू घाटों को फिर से चालू करने की प्रक्रिया जारी है और सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है। घाटों की नीलामी होते ही बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतें पुनः नियंत्रित हो जाएंगी।

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