प्रशासन की अनदेखी पर तमाचा: बोरधा के ग्रामीणों ने चंदा कर खोदा बोरवेल, पेश की आत्मनिर्भरता की शानदार मिसाल
मेलघाट: जल संकट से जूझ रहे मेलघाट के बोरधा गांव के ग्रामीणों ने प्रशासन की घोर अनदेखी के बाद आखिरकार खुद मोर्चा संभाल लिया है। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब शासन-प्रशासन ने पानी की विकट समस्या पर ध्यान नहीं दिया, तो गांव वालों ने आपसी सहयोग (लोक वर्गणी) से पैसे इकट्ठा कर खुद ही बोरवेल की खुदाई करवा ली।
प्रशासन की विफलता और आदिवासियों की आत्मनिर्भरता
ग्रामीणों के इस प्रयास को बड़ी सफलता मिली और बोरवेल में भरपूर पानी निकला है। पानी लगने की खुशी में स्थानिक लोगों ने अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपरा के अनुसार बोरवेल की महापूजा संपन्न की।
यह पूरी घटना शासन और प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली पर एक करारा तमाचा है। इससे यह स्पष्ट रूप से साबित होता है कि मेलघाट के स्थानिक आदिवासी अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए पूरी तरह से सरकार के मोहताज नहीं हैं; वे अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं करने में सक्षम हैं। प्रशासन के लिए यह बेहद शर्म की बात है कि जो मूलभूत सुविधाएं उन्हें उपलब्ध करानी चाहिए थीं, उसके लिए ग्रामीणों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ा।
युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष के हाथों हुआ उद्घाटन
ग्रामीणों की इस बड़ी उपलब्धि और सफलता के उपलक्ष्य में विशेष तौर पर युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राहुल येवले को आमंत्रित किया गया था। उनके हाथों इस नवनिर्मित बोरवेल का विधिवत उद्घाटन किया गया।
उद्घाटन के अवसर पर इनकी रही प्रमुख उपस्थिति:
इस अवसर पर गांव के कई नागरिक और गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
छन्नु भैया, लालाजी कास्देकर, सज्जु भैया, कज्जु कास्देकर, सोमा कास्देकर, मुगा धिकार, मुन्ना बेठेकर, अशोक भुसुम, मधु धिकार, संजू कास्देकर