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5 साल के मासूम के गले में फंसा सिक्का, सिम्स के डॉक्टरों ने एंडोस्कोपिक तकनीक से बचाई जान

समय पर इलाज, आधुनिक तकनीक और डॉक्टरों की तत्परता ने एक मासूम की जिंदगी बचा ली। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में 5 वर्षीय बच्चे के गले में फंसे सिक्के को एंडोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक निकालकर चिकित्सकों ने एक बार फिर अपनी दक्षता और टीम वर्क का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है।

खेलते-खेलते बच्चे के गले में फंसा सिक्का
जानकारी के अनुसार, धवलपुर (जिला चिरमिरी) निवासी 5 वर्षीय नितिन सिंह सोमवार शाम करीब 7 बजे खेलते-खेलते 5 रुपये का सिक्का निगल गया, जो उसके गले में जाकर फंस गया। सिक्का श्वसन मार्ग के पास अटकने से बच्चे को सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने लगी और उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। इसके बाद परिजन तत्काल बच्चे को सिम्स लेकर पहुंचे, जहां आपात स्थिति को देखते हुए बिना देरी के इलाज शुरू किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को सूचना दी। मंत्री ने तुरंत संज्ञान लेते हुए सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति को फोन कर इलाज को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

अधिष्ठाता के मार्गदर्शन में ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पांडे के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम गठित की गई। टीम में डॉ. विद्या भूषण साहू, डॉ. श्वेता मित्तल, डॉ. तन्मय गौतम, डॉ. बरसे महादेव तथा एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के निर्देशन में डॉ. यशा तिवारी और डॉ. बलदेव नेताम शामिल रहे।

एंडोस्कोपिक तकनीक से सफल ऑपरेशन
बच्चे की स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया गया, जहां अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हुए सटीक और सुरक्षित प्रक्रिया अपनाई गई।

एंडोस्कोपिक विधि के माध्यम से बिना किसी बड़े चीरे के, विशेष उपकरणों की सहायता से गले में फंसे सिक्के को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान एनेस्थीसिया टीम ने बच्चे की सांस और जीवनरक्षक संकेतों को पूरी सतर्कता से नियंत्रित रखा। डॉक्टरों की सूझबूझ, सटीक तकनीक और बेहतर समन्वय के चलते कुछ ही समय में ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और बच्चे की जान बच गई। वर्तमान में बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और चिकित्सकों की निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहा है ।

स्वास्थ्य मंत्री ने की सराहना
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि “सिम्स की टीम ने जिस तत्परता और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर बच्चे की जान बचाई, वह अत्यंत सराहनीय है। राज्य सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रही है और सिम्स इसका उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।”

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि “बच्चे की स्थिति अत्यंत नाजुक थी। एंडोस्कोपिक तकनीक के माध्यम से हमने बिना विलंब के सटीक हस्तक्षेप किया, जिससे जटिलता से बचते हुए सुरक्षित रूप से सिक्का निकाला जा सका। सिम्स में अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के कारण हम इस प्रकार की आपात स्थितियों को सफलतापूर्वक संभाल पा रहे हैं।”

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि “यह सफलता सिम्स की मजबूत टीमवर्क, त्वरित निर्णय क्षमता और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का परिणाम है। हमारे यहां हर मरीज के लिए 24×7 समर्पित सेवाएं उपलब्ध हैं। इस तरह की उपलब्धियां संस्थान के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत करती हैं।”

सिम्स बना भरोसे का केंद्र
इस घटना ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि सिम्स न केवल प्रदेश का प्रमुख शासकीय चिकित्सालय है, बल्कि यहां अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों और समर्पित स्टाफ के माध्यम से जटिल से जटिल आपात स्थितियों में भी प्रभावी उपचार संभव है। परिजनों ने भावुक होकर सिम्स के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ एवं पूरे प्रबंधन का आभार व्यक्त किया और कहा कि समय पर मिले उपचार और डॉक्टरों की मेहनत से उनके बच्चे को नया जीवन मिला है।

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