छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स के लिए 969 करोड़ का विशेष पुनर्वास पैकेज स्वीकृत
सांसद बंटी विवेक साहू के प्रयासों से छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स के लिए 969 करोड़ का विशेष पुनर्वास पैकेज स्वीकृत
छिंदवाड़ा, 22 अप्रैल 2026।
सांसद बंटी विवेक साहू के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना के अंतर्गत पुनर्वास हेतु 969 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को स्वीकृति मिल गई है। यह निर्णय भोपाल में आयोजित मंत्री परिषद की बैठक में लिया गया। पहले इस परियोजना के लिए 840.80 करोड़ रुपये स्वीकृत थे, जिसे बढ़ाकर अब लगभग 969 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस प्रकार पैकेज में करीब 128.2 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है।
इस विशेष पैकेज के तहत पुनर्वास कार्यों के त्वरित क्रियान्वयन और विस्थापितों को बेहतर सहयोग देने के लिए इसे केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना के समकक्ष लागू करने का निर्णय लिया गया है।
628 से बढ़कर 678 गांवों को मिलेगा लाभ
परियोजना के अंतर्गत छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिलों के कुल 678 गांवों को लाभ मिलेगा। इसमें पांढुर्णा तहसील के 129, सौंसर के 124, मोहखेड़ के 132, बिछुआ के 76, जुन्नारदेव के 126, चांद के 34, उमरेठ के 50 तथा छिंदवाड़ा तहसील के 7 गांव शामिल हैं। इस परियोजना से लगभग 1,90,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
परियोजना में संगम-1, संगम-2, रामघाट बांध (छिंदवाड़ा) तथा बेलेंसिंग रिजर्वायर (पांढुर्णा) सहित कुल 4 प्रमुख बांध प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही पेयजल, औद्योगिक उपयोग और विद्युत उत्पादन के लिए भी जल सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है।
किसानों और प्रभावितों की समस्याओं को उठाया
भोपाल प्रवास के दौरान सांसद बंटी विवेक साहू ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से मुलाकात कर किसानों और डूब प्रभावित गांवों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में अधिकांश किसान छोटे और जनजातीय वर्ग से हैं, जिनकी भूमि सीमित है और बाजार मूल्य में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है।
पांढुर्णा और सौंसर क्षेत्र में कपास और संतरे की खेती मुख्य आय का स्रोत है, जो डूब क्षेत्र में आने से प्रभावित हो रही है। किसानों द्वारा अधिक मुआवजे की मांग को लेकर विरोध भी किया गया था।
पुनर्वास और वन भूमि से जुड़ी बाधाओं का समाधान
सांसद ने सरकार को अवगत कराया कि परियोजना में पुनर्वास, भूमि अधिग्रहण और वन भूमि से संबंधित कई बाधाएं हैं, जिन्हें शासन स्तर पर हल किया जाना आवश्यक है। इसके तहत अन्य जिलों से गैर-वन भूमि उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि वन स्वीकृति प्रक्रिया पूरी की जा सके।
सांसद ने राज्य सरकार से विशेष पुनर्वास एवं भू-अर्जन पैकेज की स्वीकृति देने के साथ-साथ संबंधित जिलों को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की थी, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।