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Sultan Balban aur मौलाना कमालुद्दीन ज़ाहिद का ऊँचा इल्म

सुल्तानुल मशाइख़ हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया ؒ बयान फ़रमाते हैं कि जब मौलाना कमालुद्दीन ज़ाहिद का ऊँचा इल्म और उनकी परहेज़गारी मशहूर हुई, तो इसकी ख़बर सुल्तान ग़ियासुद्दीन बलबन तक पहुँची।

सुल्तान ने चाहा कि मौलाना साहब को इमामत सौंपी जाए, इसलिए उन्हें अपने दरबार में बुलाया। जब हज़रत मौलाना सुल्तान के सामने हाज़िर हुए, तो सुल्तान ने कहा कि वह उनके इल्म और समझ का दिल से एहतिराम करता है और अगर वे इमामत क़ुबूल कर लें तो यह उसकी बड़ी मेहरबानी होगी, ताकि उसे यक़ीन हो जाए कि उसकी नमाज़ अल्लाह तआला की बारगाह में क़बूल होगी।

इस पर हज़रत मौलाना ने दीनदारी से जवाब दिया कि उनके पास नमाज़ के सिवा और कुछ नहीं है, क्या बादशाह वह भी उनसे लेना चाहते हैं। मौलाना के इस सादे मगर गहरे जवाब को सुनकर सुल्तान ख़ामोश हो गया और समझ गया कि यह बुज़ुर्ग इमामत का पद क़ुबूल नहीं करेंगे, इसलिए उसने ख़ुद ही इस बात को छोड़ दिया।

Location 📍Sultan Balban ka Maqbara

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