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सुदर्शन आश्रम हरिद्वार मे पूज्य गुरु भगवान श्री श्री 1008 महंत सरस्वत्याचार्य जी महाराज की वार्षिक पुण्यतिथि बनाई गई

पावन तीर्थ में स्थित श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े में प्रातः स्मरणीय परम वंदनीय परम पूज्य गुरु भगवान श्री श्री 1008 महंत सरस्वत्याचार्य जी महाराज की 35वीं वार्षिक पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ संत महापुरुषों के दिव्य सानिध्य में मनाई गई। समूचा आश्रम भक्ति, आस्था और गुरु स्मरण की पावन ऊर्जा से आलोकित दिखाई दिया, जहां श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित कर आत्मिक शांति का अनुभव किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं पंचायती श्री महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी जी महाराज उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरु मंडल आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर श्री भगवत स्वरूप जी महाराज ने की। अपने उद्बोधन में महंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि सुदर्शन आश्रम अखाड़ा तप, त्याग और साधना की जीवंत परंपरा का प्रतीक है, जहां साकेतवासी पूज्य गुरुदेव साक्षात देवत्व स्वरूप होकर विराजमान रहे और भक्तों को कल्याण का पथ प्रदर्शित करते रहे।कार्यक्रम में संत महापुरुषों के दिव्य विचारों की अमृतवर्षा हुई। परम पूज्य गुरुदेव परमात्मा स्वरुप श्री महंत रघुवीर दास जी महाराज ने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु केवल मार्गदर्शक नहीं, बल्कि जीवन रूपी नौका के सच्चे खेवैया होते हैं, जो भक्त को भवसागर से पार लगाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस जीवन में गुरु का सानिध्य और कृपा होती है, वहां अज्ञान का अंधकार स्वतः ही समाप्त हो जाता है।महंत सूरज दास महाराज ने भगवान राम के भजन और भक्ति की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि राम नाम में ऐसी शक्ति है, जो मनुष्य के जीवन को सरल, पवित्र और आनंदमय बना देती है। श्री महंत बिहारी शरण महाराज ने राम नाम को कलियुग का सबसे सरल और प्रभावी साधन बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से राम का स्मरण करता है, उसके सभी कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं।

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