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बड़ा बेटा सिख और छोटा हिन्दू

इन सज्जन ने अपने बड़े बेटे को सिख बनाया है उस पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए थे जिसका आवाहन गुरु गोबिंद सिंह जी ने किया था, बड़ा बेटा सिख और छोटा हिन्दू! इतिहास दोहराया, डॉक्टर सनी सरीन मूल रूप शिमला के रहने वाले हैं परन्तु उनके वंश की जड़ें पंजाब में हैं। उनका जन्म, पालन-पोषण व डॉक्टरी की पढ़ाई शिमला में ही हुई। लेकिन एम.एस. व सर्जिकल ट्रेनिंग करने के बाद उन्होंने इंग्लैंड में ही प्रेक्टिस करने का निर्णय लिया तथा अब वहीं अपना घर ले कर रह रहे हैं। उनके दो बेटे हैं बड़े कार्तिक और छोटे रोहन।बड़े बेटे कार्तिक ने शहीदों सरदार भगत सिंह जी और सरदार उधम सिंह जी से प्रेरित होकर सिख बनने का निर्णय लिया जिसे उसके माता-पिता ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी। आज के समय में सभी के लिए यह एक प्रेरक प्रसंग हैं। इतिहास के झरोखे से देखें तो सिख गुरुओं की प्रेरणा से विदेशी आक्रांताओं से लड़ने के लिए खत्री हिन्दू अपने सबसे बड़े बेटे को सिख, यानि गुरु का शिष्य, बनाते थे जो धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर देते थे। वैसे भी सिखों के सभी दसों पूज्यनीय गुरु खत्री (क्षत्रिय) हिन्दू ही थे जिन्होंने सिख पंथ की स्थापना की है। इसलिए ही हिन्दू और सिख में रोटी-बेटी का रिश्ता है। इन्हें अलग करना असम्भव है। बड़े भाई डॉक्टर सन्नी सरीन जी को हार्दिक धन्यवाद जिन्होंने इस ऐतिहासिक प्रक्रिया की पुनरावृत्ति में कोई अड़चन पैदा नहीं की

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