*“ईडब्ल्यूएस का खेल या सरकारी सिस्टम से सीधा धोखा?”*
*“11 लाख की आमदनी, फिर भी ‘गरीब’ का सर्टिफिकेट!”*
उमरिया। जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।SECL चपहा कालरी में पदस्थ मैकेनिकल फिटर मनोज मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने अपने ही पुत्र को “आर्थिक रूप से कमजोर” दिखाकर सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा दीं।
*नौकरी दिलाने के लिए रचा गया पूरा ‘प्लान’?*
सूत्रों के मुताबिक, मनोज मिश्रा ने अपने पुत्र शिवम कुमार मिश्रा (माइनिंग सरदार, WCL नागपुर) के लिए EWS प्रमाण पत्र बनवाने हेतु ऐसा जाल बुना, जिससे पूरा सिस्टम ही गुमराह हो गया। सवाल ये है:क्या सरकारी नौकरी पाने के लिए “गरीबी” भी अब खरीदी जा सकती है?
*आय का सच: कागजों में गरीब, हकीकत में लाखों की कमाई*
आवेदन में दिखाई गई आय: ₹1,60,000 सालाना असलियत:पिता की मासिक सैलरी: ₹96,000सालाना आय: ₹11,52,000
यानी कागजों में “गरीब”, लेकिन असल में लाखों की आय वाला परिवार!
*समग्र आईडी से खेल: पकड़ से बचने की चाल?*
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा बेटे की समग्र आईडी को परिवार से अलग कराया गया नया परिवार बनाकर “कम आय” दिखाने की कोशिश अनुरोध ID: 1449855 के जरिए किया गया विभाजन क्या ये सब पहले से तय साजिश नहीं लगती?
*“भूमिहीन” का दावा, लेकिन जमीन का साम्राज्य!*
शिवम मिश्रा ने खुद को आवेदन में “भूमिहीन” बताया, जबकि: जिला रीवा(तहसील हजूर) और जिला मैहर(तहसील अमरपाटन) में
परिवार के नाम आवासीय और कृषि भूमि मौजूद तो फिर ये “गरीबी” आई कहां से?
*प्रशासन पर भी सवाल*
तहसीलदार बांधवगढ़ द्वारा जारी:
प्रकरण क्रमांक: 0017 ब-121/2021-22
दिनांक: 14/06/2021क्या बिना जांच के प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया या फिर सिस्टम में कहीं “मिलीभगत” भी है?*
*बड़ा खुलासा: नियमों को दिखाया गया ठेंगा*
मध्य प्रदेश शासन के 29 जून 2021 के स्पष्ट नियम कहते हैं कि:8 लाख से अधिक आय वाला परिवार EWS में नहीं आएगा
फिर 11 लाख कमाने वाला परिवार इस श्रेणी में कैसे घुस गया?
*अब क्या करेगा प्रशासन?*
यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि:सरकारी योजनाओं की साख
ईमानदार गरीबों का हक और भ्रष्ट सिस्टम की पोल तीनों को एक साथ उजागर करता है।
*जनता का गुस्सा: “हक छीना गया, जवाब चाहिए!”*
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और मांग उठ रही है:
फर्जी EWS प्रमाण पत्र तुरंत रद्द हो
पूरे मामले की CBI या उच्चस्तरीय जांच हो दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई हो
क्या “पैसे और पहुंच” के दम पर अब कोई भी खुद को गरीब साबित कर सकता है?
अगर हां, तो फिर असली गरीबों के हक का क्या?यह मामला अब सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि “सिस्टम बनाम सच” की लड़ाई बन चुका है।