उर्दू अदब में नई दस्तक— “पलामू और नसरी अदब” पुस्तक का विमोचन
मेदिनीनगर: उर्दू साहित्य की दुनिया में वर्ष 2026 के लिए एक महत्वपूर्ण नई कृति के रूप में डॉ. मक़बूल मंजर की पुस्तक “पलामू और नसरी अदब” चर्चा में है। नादिम बल्ख़ी की जश्न-ए-सदी के अवसर पर आयोजित एक अदबी सेमिनार में इस पुस्तक का विमोचन प्रख्यात विद्वानों डॉ. सैयद हसन अब्बास, प्रो. जमील अख्तर मोहिब्बी और डॉ. मुजफ्फर बल्ख़ी के हाथों संपन्न हुआ।
296 पृष्ठों की इस शोधपरक और आलोचनात्मक पुस्तक में पलामू के इतिहास, उर्दू भाषा व साहित्य के विकास, शोध व आलोचना की परंपरा तथा स्थानीय कहानी साहित्य का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक के पांच अध्यायों में पलामू की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, चेरो शासन, मुग़ल व अंग्रेज़ी दौर, उर्दू के आगमन और विकास से लेकर समकालीन अदबी गतिविधियों तक का व्यापक विवरण शामिल है।
डॉ. मंजर ने इस कृति को उन अदीबों और फनकारों को समर्पित किया है, जिनके प्रयासों से पलामू में उर्दू का चिराग रोशन है। पुस्तक में जपला-हुसैनाबाद को उर्दू का प्रमुख केंद्र बताते हुए नवाब हिदायत अली ख़ान और नवाब ग़ुलाम हुसैन ख़ाँ की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। साथ ही अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ाँ के पलामू प्रवास और स्थानीय साहित्यकारों के योगदान का उल्लेख भी महत्वपूर्ण रूप से किया गया है।
साहित्यिक हलकों में इस पुस्तक को न केवल ज्ञानवर्धक बल्कि शोधकर्ताओं और उर्दू प्रेमियों के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ के रूप में देखा जा रहा है। डॉ. मक़बूल मंजर की यह कृति पलामू की अदबी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।