अब गढ़वा भी नहीं किसी से कम,राजघराना NXT ने बदली शहर की तस्वीर
गढ़वा - गढ़वा की सुबह आज कुछ अलग थी,हवा में उत्साह था,सड़कों पर रौनक थी और लोगों की आंखों में एक नई चमक,वजह थी कचहरी रोड पर खुला राजघराना NXT सिर्फ एक शोरूम नहीं,बल्कि शहर के सपनों का नया पता।
वर्ष 1998 में राजघराना नाम से शुरू हुआ यह सफर आज एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया,21 हजार स्क्वायर फीट में फैला यह भव्य शोरूम जब विधि विधान,मंत्रोच्चार और तालियों की गूंज के बीच फीता काटकर खोला गया,तो लगा जैसे गढ़वा ने खुद अपनी तरक्की का जश्न मनाया हो,संस्थापक द्वारिका प्रसाद केसरी और रेखा देवी के साथ पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर की मौजूदगी ने इस पल को और खास बना दिया।
मंच से जब मिथिलेश ठाकुर बोले,तो उनकी बातों में सिर्फ शब्द नहीं थे,बल्कि गढ़वा के बदलते चेहरे की सच्चाई झलक रही थी,उन्होंने कहा कि अब गढ़वा के लोगों को खरीदारी के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं देखना पड़ेगा,क्योंकि अब बड़ा शहर खुद गढ़वा में आ चुका है,राजघराना NXT उस बदलाव की जीती जागती तस्वीर है,जहां विकास सिर्फ दिखता नहीं,महसूस भी होता है।
शाम होते होते माहौल और रंगीन हो गया,जैसे ही भोजपुरी स्टार अक्षरा सिंह मंच पर पहुंचीं,पूरा परिसर तालियों और उत्साह से गूंज उठा,उन्होंने भी गढ़वा से अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि अब यहां के लोगों को मुंबई या पटना जैसा अनुभव अपने ही शहर में मिलेगा,उनके शब्दों ने इस उद्घाटन को एक इमोशनल टच दे दिया।
लेकिन यह सिर्फ एक उद्घाटन नहीं था,यह एक अनुभव था,फैशन शो की चमक,सिंगिंग परफॉर्मेंस की धुन और लोगों की मुस्कान हर एक पल ने इस दिन को यादगार बना दिया,युवाओं के लिए यह एक नया ट्रेंड था,तो बुजुर्गों के लिए गर्व का पल।
प्रोपराइटर रवि केसरी की आंखों में खुशी साफ दिख रही थी,उन्होंने कहा कि यह सब गढ़वा की जनता के भरोसे का नतीजा है,वहीं धीरज केसरी और श्रेयांश केसरी ने इसे कम्पलीट फैशन हब बताया,जहां हर उम्र,हर वर्ग और हर पसंद के लिए सब कुछ एक ही छत के नीचे मिलेगा।
बात यहीं खत्म नहीं होती,ग्राहकों के लिए मेगा लकी ड्रॉ का ऐलान भी इस खुशी में चार चांद लगा गया,अब हर खरीदारी सिर्फ शॉपिंग नहीं,बल्कि एक उम्मीद भी साथ लाएगी बाइक,स्कूटी और कई बड़े इनाम जीतने की,इस पूरे आयोजन में सिर्फ भीड़ नहीं थी,अपनापन था,गर्व था और एक यकीन था कि गढ़वा अब बदल रहा है,आगे बढ़ रहा है।
राजघराना NXT का यह भव्य उद्घाटन सिर्फ एक दुकान का खुलना नहीं है,यह उस सोच का जन्म है,जहां छोटे शहर भी बड़े सपने देखने और उन्हें जीने लगे हैं।