अजब-गजब: धनबाद प्रशासन ने 8वीं पास 'माता समिति' की संयोजिका को बना दिया मजिस्ट्रेट, सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले से प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहाँ होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया में एक ऐसी महिला को दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) नियुक्त कर दिया गया, जो महज आठवीं कक्षा तक पढ़ी हैं और स्कूल में बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) की व्यवस्था देखती हैं।
क्या है पूरा मामला?
धनबाद के बिरसा मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में इन दिनों होमगार्ड जवानों की बहाली चल रही है। इस प्रक्रिया के लिए जिला प्रशासन की ओर से दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी। इसी क्रम में, मध्य विद्यालय धैया की माता समिति की संयोजिका रूपम देवी को मजिस्ट्रेट बना दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि उन्हें अभ्यर्थियों की 'हिंदी लेखन क्षमता' की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। प्रशासन के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
तनाव में हैं रूपम देवी
मात्र 8वीं तक शिक्षित रूपम देवी इस आदेश के बाद से काफी तनाव में हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से स्कूल में माता समिति की संयोजिका के रूप में बच्चों को खाना खिलाने और राशन की व्यवस्था करने का काम कर रही हैं। उन्हें अचानक मोबाइल पर मजिस्ट्रेट बनाए जाने का पत्र मिला, जिसे देखकर वह हैरान रह गईं। रूपम देवी ने कहा, "मैं इतनी पढ़ी-लिखी नहीं हूं कि मजिस्ट्रेट का काम कर सकूं या किसी की हिंदी लेखन क्षमता की जांच कर सकूं।"
प्रशासन की बड़ी चूक
सूत्रों के अनुसार, पहले यह जिम्मेदारी प्लस टू उच्च विद्यालय धनबाद की हिंदी शिक्षिका आशा कुमारी को दी गई थी। लेकिन बाद में उनके स्थान पर रूपम देवी को प्रतिनियुक्त कर दिया गया। स्कूल के शिक्षकों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं कि आखिर एक गैर-शैक्षणिक और कम पढ़ी-लिखी महिला को इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे दे दी गई।
जांच के आदेश
मामला तूल पकड़ने के बाद धनबाद की एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) हेमा प्रसाद ने कहा कि मजिस्ट्रेट के लिए नामों की सूची शिक्षा विभाग की ओर से भेजी गई थी। उन्होंने इस मामले में अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि यह जांच का विषय है कि किस स्तर पर यह गलती हुई है और दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।