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आज का पंचाग

🚩श्री बालाजी परिवार पंचांग 🚩
☀ 22-अप्रैल -2026
📍कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
🔅 वार बुधवार
🔅 तिथि षष्ठी 10:52 PM
🔅 नक्षत्र आर्द्रा 10:14 PM
🔅 करण कौलव, तैतिल 12:04 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग अतिगंड 09:08 AM
🔅 सूर्योदय 05:49 AM
🔅 चन्द्रोदय 09:41 AM
🔅 ऋतु ग्रीष्म
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास पूर्णिमांत वैशाख
व्रत त्योहार इतिहास:~ आज स्कन्द षष्ठी का पावन व्रत है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, भगवान कार्तिकेय (जिन्हें स्कन्द या मुरुगन भी कहा जाता है) को समर्पित है।
पृथ्वी दिवस पृथ्वी मेरी माता है और मैं उसका पुत्र हूँ के भाव से इसे प्रकृति की पूजा के रूप में देखा जाता है।
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*अकाल मृत्यु कारण और निवारण*

धर्म और शास्त्रों के अनुसार, 'अकाल मृत्यु' (समय से पूर्व मृत्यु) का विषय अत्यंत गहरा है। इसे आमतौर पर प्रारब्ध, कर्म और जीवन के चक्र से जोड़कर देखा जाता है।
यहाँ कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं जो आध्यात्मिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से अकाल मृत्यु का आधार माने जाते हैं:
1. कर्मों का फल (प्रारब्ध)
गरुड़ पुराण और अन्य ग्रंथों के अनुसार, मनुष्य की आयु उसके कर्मों द्वारा निर्धारित होती है।
• संचित कर्म: पिछले जन्मों के कुछ ऐसे 'नकारात्मक कर्म' होते हैं, जिनका फल अकाल मृत्यु के रूप में सामने आता है।
• घोर पाप: शास्त्रों में माना गया है कि जीव हत्या, विश्वासघात या अत्यंत अनैतिक कार्यों से व्यक्ति की पुण्य आयु क्षीण हो जाती है।
1. जीवनशैली और असावधानी
ऋषि-मुनियों ने आयुर्वेद और धर्मशास्त्रों में स्पष्ट किया है कि मनुष्य अपने स्वयं के आचरण से भी अपनी आयु घटा लेता है:
• अत्यधिक नशा और तामसिक भोजन: शरीर को जहर के समान नुकसान पहुँचाने वाली चीजें शारीरिक तंत्र को समय से पहले विफल कर देती हैं।
• असावधानी: दुर्घटनाएं अक्सर मानवीय भूल या सुरक्षा के नियमों की अनदेखी का परिणाम होती हैं।
1. ऊर्जा और योगिक दृष्टिकोण
योग विज्ञान के अनुसार, हर मनुष्य को जन्म के समय 'सांसों की एक निश्चित संख्या' मिलती है।
• जब कोई व्यक्ति बहुत क्रोध, तनाव या उत्तेजना में रहता है, तो उसकी सांसों की गति तेज हो जाती है, जिससे वह अपनी जीवन ऊर्जा (Prana) को जल्दी खर्च कर देता है।
1. ईश्वरीय विधान या उद्देश्य
कभी-कभी ऐसा माना जाता है कि किसी आत्मा का इस धरती पर जो 'उद्देश्य' या 'लेना-देना' था, वह अल्पायु में ही पूर्ण हो गया। जैसे ही उस आत्मा का इस जन्म का हिस्सा समाप्त होता है, वह शरीर त्याग देती है।
गरुड़ पुराण के अनुसार बचाव के उपाय:
शास्त्रों में कहा गया है कि धर्म का पालन और सात्विक जीवन अकाल मृत्यु के भय को कम करता है:
• महामृत्युंजय मंत्र: भगवान शिव की उपासना को अकाल मृत्यु से बचने का सबसे प्रभावी आध्यात्मिक मार्ग माना गया है।
• दान और सेवा: दूसरों की मदद करने से 'पुण्य' बढ़ता है जो संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है।
• संयमित जीवन: योग, प्राणायाम और सही आहार शरीर को लंबी आयु प्रदान करते हैं।
निष्कर्ष: अकाल मृत्यु एक जटिल घटना है जिसमें भाग्य (नियति) और कर्म (वर्तमान क्रियाएं) दोनों की भूमिका होती है। जहाँ हम भाग्य को नहीं बदल सकते, वहीं अपनी आदतों और सुरक्षा के प्रति सजग रहकर हम जीवन की रक्षा अवश्य कर सकते हैं।
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