सफलता की कहानी
सफलता की कहानी
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"भारतीय रेलवे की पटरियों पर दौड़ती सफलता की एक अनूठी दास्तां"
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सफलता की गूंज: शासकीय आईटीआई विदिशा के गौरव श्री शंकर रघुवंशी की प्रेरक यात्रा, भारतीय रेलवे में सहायक लोको पायलट बने
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शासकीय आईटीआई विदिशा (सत्र 2016-2018, इलेक्ट्रीशियन ट्रेड) के पूर्व छात्र श्री शंकर रघुवंशी ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से न केवल अपने परिवार, बल्कि शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान विदिशा का नाम पूरे मध्य प्रदेश में रोशन किया है। शंकर ने सत्यापित लोको पायलट (ALP) 2024 भर्ती में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए शानदार रैंक हासिल की है। वेस्ट सेंट्रल रेलवे (WCR): पूरे जोन में 6वीं रैंक, भोपाल डिवीजन: चौथी रैंक लाकर उन्होंने अपने परिवार को गौरवान्वित कर दिखाया है।
संघर्ष से सफलता का सफर: विदिशा जिले के तहसील गुलाबगंज के एक छोटे से गांव बिलराई के रहने वाले श्री शंकर एक कृषक परिवार से आते हैं। उनके पिता, श्री बलराम सिंह रघुवंशी जो स्वयं कृषि कार्य से जुड़े हैं, शंकर के लिए प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत रहे हैं।
श्री शंकर के सफल होने की यह यात्रा धैर्य की एक मिसाल है। 2018 में आईटीआई पूर्ण करने के बाद, उन्होंने लंबी प्रतीक्षा की। इस दौरान उन्होंने खाली बैठने के बजाय 2 वर्षों तक NGO और जिला शिक्षा परियोजना के साथ सामाजिक क्षेत्र में कार्य किया। जब 2024 में भर्ती आई, तो उन्होंने अपनी वर्षों की तपस्या को सफलता में बदल दिया और अपने परिवार के पहले सरकारी कर्मचारी बनने का गौरव प्राप्त किया।
देश सेवा का संकल्प: वर्तमान में शंकर लखनऊ और भोपाल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। आगामी 2 माह में वे भोपाल डिवीजन की लॉबी में पदस्थ होकर 'भारतीय रेलवे'—जो भारत की जीवन रेखा है— के सारथी के रूप में अपनी सेवाएं देंगे।
वर्तमान में शंकर रेलवे की ओर से निश्चित स्टाइपेंड (Stipend) प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उनकी आत्मनिर्भरता की शुरुआत हो चुकी है।
शानदार भविष्य: एक सहायक लोको पायलट के रूप में प्रथम सैलरी लगभग ₹60,000 के आसपास रहती है, जो समय और अनुभव के साथ निरंतर बढ़ती जाएगी।
शंकर का संदेश: "एक लोको पायलट की भूमिका सिर्फ ट्रेन चलाना नहीं, बल्कि लाखों उम्मीदों को उनकी मंजिल तक सुरक्षित पहुँचाना है। आईटीआई की शिक्षा ने उनके तकनीकी आधार को मजबूत किया, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया।
Jansampark Madhya Pradesh
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