धधकती लू और 44 डिग्री पारा: शिक्षा विभाग का क्रूर फैसला! मासूम बच्चों की 'अग्निपरीक्षा' से अभिभावक आक्रोशित
महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद का संवेदनहीन चेहरा: भरी दुपहरी में होगी चौथी और सातवीं की स्कॉलरशिप परीक्षा; क्या नौनिहालों की सेहत से बड़ा है इम्तिहान?
खबर का मुख्य अंश
महाराष्ट्र शिक्षा विभाग का एक बेहद अजीबोगरीब और संवेदनहीन कारनाम सामने आया है। जहाँ पूरा राज्य भीषण गर्मी और 44 डिग्री सेल्सियस के टॉर्चर से जूझ रहा है, वहीं 'महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद' ने 24 अप्रैल (रविवार) को चौथी और सातवीं कक्षा के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति (Scholarship) परीक्षा आयोजित करने का फरमान जारी कर दिया है।
अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि जब प्रशासन भीषण गर्मी के कारण स्कूलों में समय से पहले छुट्टियां घोषित कर रहा है, तब इन मासूम बच्चों को तपती धूप में परीक्षा केंद्रों तक दौड़ाया जा रहा है।
परीक्षा का 'खतरनाक' शेड्यूल
इस परीक्षा के लिए जो समय तय किया गया है, उसने आग में घी डालने का काम किया है:
पहला पेपर: सुबह 11:00 से दोपहर 12:30 बजे (भाषा और गणित)
दूसरा पेपर: दोपहर 02:00 से 03:30 बजे (अंग्रेजी और बुद्धिमत्ता चाचणी)
सबसे बड़ी मुसीबत: दूसरा पेपर उस वक्त होगा जब सूरज अपने चरम पर होगा और लू (Heat Wave) सबसे ज्यादा घातक होती है।
मुख्य चिंताएं: क्यों उठ रहे हैं सवाल?
5-10 किलोमीटर का सफर: कई छात्रों के परीक्षा केंद्र उनके घर या शहर से 5 से 10 किलोमीटर दूर हैं। तपती दोपहर में बच्चों को केंद्रों तक ले जाना माता-पिता के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
सेहत पर खतरा: 44 डिग्री तापमान में 9 से 12 साल के बच्चों को लू लगने (Heatstroke) और डिहाइड्रेशन का गंभीर खतरा है।
प्रशासनिक विरोधाभास: एक तरफ गर्मी के कारण स्कूलों को बंद किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसी विभाग की परीक्षा परिषद बच्चों को सड़क पर निकलने के लिए मजबूर कर रही है।
अव्यवस्था का आलम: परीक्षा केंद्रों पर पीने के ठंडे पानी और प्राथमिक उपचार की समुचित व्यवस्था होगी या नहीं, इसे लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
"क्या शिक्षा विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? बच्चों के भविष्य के नाम पर उनकी जान जोखिम में डालना सरासर गलत है!" — परेशान अभिभावकों की सामूहिक प्रतिक्रिया
निष्कर्ष:
शिक्षा विभाग के इस 'भोंगळ' (लापरवाह) और संवेदनहीन निर्णय ने हजारों छात्रों और उनके पालकों की नींद उड़ा दी है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर परीक्षा के समय में बदलाव करती है या मासूम बच्चों को इस तपती 'अग्निपरीक्षा' से गुजरना ही पड़ेगा।