मनरेगा भुगतान रुका… ग्राम पंचायतों की हालत बदहाल! मजदूर बेहाल, विकास कार्य अधर में
सारंगढ़-बिलाईगढ़/सरसींवा/पेंड्रावन /बिलाईगढ़//मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी भुगतान और मटेरियल भुगतान महीनों से अटका हुआ है, जिसके कारण सरसींवा पेंड्रावन क्षेत्र से लेकर बिलाईगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ की ज्यादातर ग्राम पंचायतें भारी संकट से गुजर रही हैं। जिन योजनाओं से ग्रामीणों को रोजगार और पंचायतों को विकास मिलता था, वही योजनाएँ आज भुगतान न होने के कारण ठप पड़ी हैं।
मजदूरों की जेब खाली, घरों में संकट
गर्मी के 42–45 डिग्री तापमान में दिनभर खून-पसीना बहाने वाले मजदूरों को महीनों से मजदूरी नहीं मिली। कई मजदूर अपना पेट भरने तक को मोहताज हैं। राशन उधार में लेना पड़ रहा है और घर चलाना मुश्किल हो गया है। मजदूरों का कहना है—
“काम तो करवाते हैं, लेकिन पैसा कब देंगे कोई नहीं बताता!”
मटेरियल भुगतान न होने से निर्माण कार्य अधूरा
बिलाईगढ़ और आसपास की पंचायतों में तालाब गहरीकरण, सड़क सुधार, नाली निर्माण, गौठान की मरम्मत, सामुदायिक भवनों की रंगाई–पुताई जैसे कार्य आधे में ही बंद पड़े हैं।
सचिवों और रोजगार सहायकों का कहना है—
“भुगतान होगा तब तो मटेरियल लाएँगे… उधार देने वाले भी अब सामान देने को तैयार नहीं।”
ग्राम पंचायतों की छवि पर सीधा असर
ग्राम पंचायतें इस संकट के कारण दोहरी मार झेल रही हैं—
ग्रामीण विकास कार्य बंद
मजदूर नाराज़ और प्रशासन अवगत होने के बावजूद कार्रवाई धीमी
सरपंचों का कहना है कि भुगतान में लगातार देरी से पंचायतों की छवि धूमिल हो रही है और शासन की योजनाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
पोर्टल में देरी या प्रशासनिक लापरवाही?
ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाया है कि आखिर भुगतान अटकने की असली वजह क्या है?
पोर्टल पर तकनीकी देरी?
राशि जारी नहीं हुई?
या जिम्मेदार विभागों की लापरवाही?
सवाल जितने बड़े हैं, जवाब उतने ही धुंधले।
जल्द समाधान नहीं हुआ तो विरोध की चेतावनी
ग्रामीण मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मजदूरी और मटेरियल भुगतान जारी नहीं हुआ, तो वे सामूहिक रूप से धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। पंचायतों ने भी प्रशासन को लिखित रूप से अवगत कराया है कि भुगतान रुकने से विकास कार्य पूरी तरह बाधित हो चुका है।