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चराइदेव ज़िले के सोनारी में सामने आया यह मामला न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि पुलिस और स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है

असम के चराइदेव ज़िले के सोनारी में सामने आया यह मामला न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि पुलिस और स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर 12 के निवासी बिजॉय कुर्मी को मृत मानते हुए पुलिस ने चराइदेव जिला सिविल अस्पताल की मोर्चरी से एक अज्ञात शव परिवार को सौंप दिया। पहचान की प्रक्रिया कथित तौर पर सतही रही, जिसके आधार पर परिजनों ने शव को बिजॉय मान लिया। इसके बाद परिजनों, बड़े भाई बिनोद कुर्मी और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। लेकिन घटना ने नाटकीय मोड़ तब लिया जब लगभग 24 घंटे बाद स्वयं बिजॉय कुर्मी जीवित और सामान्य अवस्था में अपने घर लौट आया। उसे देखकर परिवार के लोग स्तब्ध रह गए, वहीं पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर कौन था। शव की वास्तविक पहचान अब तक नहीं हो पाई है। इस घटना ने पुलिस की पहचान प्रक्रिया, मोर्चरी प्रबंधन और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.

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