मंगलवार को पूर्वोत्तर भारत और म्यांमार सीमा क्षेत्र में एक के बाद एक आए दो भूकंपों ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया :-
मंगलवार को पूर्वोत्तर भारत और म्यांमार सीमा क्षेत्र में एक के बाद एक आए दो भूकंपों ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया। National Center for Seismology के अनुसार, पहला भूकंप मणिपुर के Kamjong के पास सुबह 05:59:33 बजे आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.2 दर्ज की गई। यह भूकंप 24.703° उत्तरी अक्षांश और 94.415° पूर्वी देशांतर पर स्थित था तथा इसकी गहराई लगभग 62 किलोमीटर मापी गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक मध्यम गहराई (Intermediate Depth) का भूकंप था, जिसके कारण इसके झटके अपेक्षाकृत बड़े क्षेत्र में महसूस किए गए, हालांकि इसकी विनाशकारी क्षमता सीमित रही। इसी क्रम में, लगभग उसी समय म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र के हकामती जिले के तातकोन इलाके के पास भी 5.2 तीव्रता का एक और भूकंप दर्ज किया गया। इस दूसरे झटके ने यह संकेत दिया कि पूरा इंडो-बर्मा टेक्टोनिक बेल्ट इस समय सक्रिय अवस्था में है और क्षेत्रीय स्तर पर भूगर्भीय हलचल जारी है।भूकंप के झटके असम के कई हिस्सों, विशेष रूप से Guwahati में भी महसूस किए गए। स्थानीय निवासियों ने इमारतों में हल्की कंपकंपी और कुछ सेकंड तक जमीन के हिलने की पुष्टि की। कई लोग एहतियात के तौर पर घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए, हालांकि किसी भी बड़े नुकसान या जनहानि की तत्काल कोई सूचना नहीं मिली है। भूकंप वैज्ञानिकों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत का यह इलाका भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और इसे उच्च जोखिम वाले जोन में रखा गया है। इंडो-बर्मा प्लेट सीमा पर लगातार टेक्टोनिक दबाव के कारण इस तरह की घटनाएं समय-समय पर होती रहती हैं। प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है और आपदा प्रबंधन टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें और किसी भी आपात स्थिति में केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों ने संभावित आफ्टरशॉक्स को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है।