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समाज-समरसता, संस्कार और संगठन का महापर्व—वैष्णो बैरागी समाज का भव्य सामूहिक वैवाहिक एवं परिचय सम्मेलन....

रतलाम की पुण्यभूमि पर वैष्णो बैरागी समाज द्वारा आयोजित 31वाँ सामूहिक विवाह एवं परिचय सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और सामूहिक उत्तरदायित्व का जीवंत उत्सव बनकर उभरा। यह आयोजन उस आदर्श का प्रतीक है, जहाँ विवाह जैसे पवित्र संस्कार को सादगी, गरिमा और सहयोग की भावना के साथ संपन्न किया जाता है, और समाज एक परिवार के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाता है।

आज के समय में, जब विवाह समारोह अनावश्यक आडंबर और व्यय का माध्यम बनते जा रहे हैं, ऐसे में सामूहिक विवाह की यह परंपरा समाज को एक नई दिशा देती है। यह न केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को संबल प्रदान करती है, बल्कि सामाजिक समानता, सहयोग और संस्कारों की पुनर्स्थापना का भी माध्यम बनती है। इस आयोजन में सभी वर-वधू एक समान गरिमा और सम्मान के साथ अपने नवजीवन की शुरुआत करते हैं—यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित, अनुशासित और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, मंगल गीतों और पारंपरिक विधियों के बीच विवाह संस्कार संपन्न हुए, वहीं युवक-युवती परिचय सम्मेलन ने समाज के युवाओं को एक सशक्त मंच प्रदान किया। प्रतिभा सम्मान समारोह ने समाज के मेधावी व्यक्तित्वों को सम्मानित कर प्रेरणा का संचार किया, जिससे यह आयोजन केवल विवाह तक सीमित न रहकर एक व्यापक सामाजिक महोत्सव बन गया।

समाज के अध्यक्ष श्री अशोक बैरागी एवं जिला महिला अध्यक्ष श्रीमती शकुंतला बैरागी के कुशल नेतृत्व में यह आयोजन पूर्णतः सफल एवं अनुकरणीय रहा। उनके मार्गदर्शन में समस्त पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन अत्यंत निष्ठा और समर्पण के साथ किया।

समारोह की गरिमा उस समय और अधिक बढ़ गई, जब समाज के शिरोमणि एवं मुख्य अतिथि के रूप में अनेक विद्वतजन उपस्थित रहे। विशेष रूप से श्री भारत दास बैरागी (पूर्व राज्य मंत्री, ) की उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्ट ऊँचाई प्रदान की। उनके साथ अनेक गणमान्य, प्रबुद्ध एवं सम्मानित व्यक्तित्वों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और भी अधिक प्रतिष्ठित एवं स्मरणीय बना दिया।

संगठनात्मक दृष्टि से यह आयोजन एक आदर्श उदाहरण रहा। महासचिव श्री सुनील बैरागी एवं डॉ. महेन्द्र बैरागी (रतलाम), सचिव श्री नागेश्वर बैरागी एवं श्री ललित बैरागी, कोषाध्यक्ष श्री राजेन्द्र बैरागी एवं श्री राजू बैरागी ने संगठन की आधारशिला को सुदृढ़ बनाए रखा। उपाध्यक्षों में श्री मनीष बैरागी (ट्रांसपोर्ट वाले, रतलाम), श्री दशरथदास बैरागी, श्री जीवनदास बैरागी, श्री मनोहर बैरागी (राजेन्द्र नगर), श्री पवन बैरागी (रेल्वे, रतलाम), पं. अनिरुद्ध मुरारी एवं श्री संतोष बैरागी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी निभाते हुए श्री दिनेश बैरागी, श्री श्याम बैरागी, श्री संतोष बैरागी, श्री सत्यनारायण बैरागी, श्री मुकेश बैरागी, एडवोकेट श्री शैलेन्द्र लश्करी, श्री विशाल बैरागी, श्री प्रशांत बैरागी, श्री हेमेन्द्र बैरागी, श्री नवीन बैरागी एवं श्री राजेश बैरागी ने कार्यक्रम की जानकारी जन-जन तक पहुँचाई। मीडिया प्रभारी के रूप में श्री मोहनिश बैरागी (रतलाम), श्री जितेन्द्रदास बैरागी (सारंगी), श्री ओमप्रकाश बैरागी (सारंगी), श्री लोकेन्द्र बैरागी (सारंगी) एवं श्री जग्गु बैरागी (रतलाम) ने आयोजन को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया।

मंच संचालन का दायित्व श्री ललित बैरागी एवं श्री राधेश्याम बैरागी ने अत्यंत प्रभावशाली एवं मर्यादित शैली में निभाया, जिससे कार्यक्रम का प्रवाह सतत और आकर्षक बना रहा। भोजन-प्रसादी व्यवस्था में श्री मनीष बैरागी, श्री पवन बैरागी, श्री राजेश बैरागी, श्री विजय बैरागी, श्री राजू बैरागी एवं श्री गोपाल बैरागी ने उत्कृष्ट प्रबंधन का परिचय दिया, जिससे हजारों लोगों के बीच भी व्यवस्था संतुलित और संतोषजनक रही।

संरक्षकों—श्री विष्णुदासजी बैरागी (तितरी), श्री राधेश्यामदासजी बैरागी (आम्या) एवं श्री नारायणदासजी बैरागी (अमलेठा)—का आशीर्वाद इस आयोजन की आधारशिला बना। वहीं वरिष्ठ मार्गदर्शक मंडल—श्री अर्जुनदासजी निमावत, श्री सज्जनदासजी बैरागी, श्री रणछोड़दासजी बैरागी, श्री भेरूदासजी बैरागी, श्री बाबुदासजी बैरागी, श्री राधेलालजी बैरागी, श्री गणपतदासजी बैरागी, श्री बंकटदासजी बैरागी, महंत श्री प्रेमदासजी बैरागी एवं श्री रामचरणदासजी बैरागी—के अनुभव और मार्गदर्शन ने आयोजन को दिशा और स्थिरता प्रदान की।

इस पावन अवसर पर स्वर्गीय राहुल बैरागी की पुण्य स्मृति में डॉ. महेन्द्र बैरागी द्वारा निशुल्क जल वितरण की व्यवस्था की गई, जो सेवा, संवेदना और स्मृति का अद्भुत संगम थी। यह प्रयास न केवल मानवता की सेवा का प्रतीक था, बल्कि स्वर्गीय राहुल बैरागी की स्मृतियों को जीवंत रखने का एक हृदयस्पर्शी माध्यम भी बना।

पत्रकार की दृष्टि से स्वयं इस आयोजन का प्रत्यक्षदर्शी होने के नाते यह कहना पूर्णतः समीचीन है कि यह कार्यक्रम केवल एक विवाह आयोजन नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक शक्ति, सांस्कृतिक चेतना और संगठनात्मक क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया। यहाँ हर व्यक्ति ने अपने दायित्व को केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण के रूप में निभाया।

अंततः, समस्त पदाधिकारियों, संरक्षकों, मार्गदर्शकों, सहयोगियों एवं समाजजनों के संयुक्त प्रयासों से यह आयोजन पूर्णतः सफल, भव्य और प्रेरणास्पद रूप में संपन्न हुआ—जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श और समाज के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव अंकित रहेगा।

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