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आचार्य प्रवर श्री दिव्यानंद सुरेश्वर जी महाराज का श्री हिताभिलाषी सर्वहितकारी विद्या मंदिर, बुढलाड़ा (मानसा) में आगमन


"अस्यां तिथौ क्षयमुपैति हुतं न दत्तं।
तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया॥"

आचार्य प्रवर श्री दिव्यानंद सुरेश्वर जी महाराज का श्री हिताभिलाषी सर्वहितकारी विद्या मंदिर, बुढलाड़ा (मानसा) में आगमन अत्यंत सौभाग्यपूर्ण रहा। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर वे विशेष रूप से विद्यालय पहुंचे और अपने आशीर्वचनों से विद्यार्थियों को प्रेरित किया।

उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए अक्षय तृतीया के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जिसे आखा तीज भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए सभी शुभ कार्यों का फल अक्षय (अविनाशी) होता है।

महाराज जी ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि वे अपने जीवन में लगन, मेहनत और आत्मविश्वास को अपनाकर शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ें। उनके प्रेरणादायक शब्दों ने बच्चों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।

विद्यालय की मैनेजमेंट कमेटी ने महाराज जी का बड़े ही हर्ष और सम्मान के साथ स्वागत किया तथा उनके मार्गदर्शन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

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