सत्ता के सर्कस में झूलमुडी और एंबुलेंस का खेल
सत्ता का सर्कस: झूठ, जुमला और जाल
झूलमुड़ी की घटना ने, असली चेहरा दिखा दिया,
दुकानदार को रक्षक कह, दुनिया को भरमा दिया।
एसपीजी की वर्दी में, जब बहरूपिया आता है,
समझो लोकतंत्र यहाँ, बस इवेंट बन जाता है।
वो बिना जांच की एंबुलेंस, सड़कों पर दौड़ती है,
मरीज नहीं, वो साहेब की, इमेज को गढ़ती है।
कैमरा सेट है, पोज रेडी, सायरन भी बजता है,
बिना स्क्रिप्ट के साहेब का, कोई काम न फबता है।
शिक्षा की खिड़की टूटी है, अस्पताल में ताले हैं,
डिग्री साहेब की गुप्त है, पर जनता के नसीब काले हैं।
पढ़-लिखकर जो युवा आज, सड़कों पर खाक छानते हैं,
दो कौड़ी के जुमले को, वो अब चोट पहचानते हैं।
खेतों में किसान खड़ा, अपनी किस्मत पर रोता है,
दाता है जो अन्न का, वो सड़कों पर ही सोता है।
कीलें ठोंकी राहों में, आंसू गैस चलवा दी,
वाह रे साहेब! आपने, खूब अपनी साख बना दी।
नारियों की चीखें देखो, गूंज रही हाथरस-बृजभूषण तक,
सत्ता का संरक्षण मिला, उन अपराधियों के दामन तक।
बेटी बचाओ का नारा, अब बस दीवारों की शोभा है,
अपराधियों को फूल-माला, यही भाजपा का लोभा है।
जो सच बोले, जो सर उठाए, उसे जेल भेज देते हैं,
ईडी, सीबीआई का शिकंजा, पल भर में कस देते हैं।
पर जो गुंडा भाजपा की, वॉशिंग मशीन में धुल जाए,
सारे पाप धुल जाते उसके, वो 'दूध का धुला' बन जाए।
महंगाई ने कमर तोड़ दी, जेबें सबकी खाली हैं,
अडानी की तिजोरी में, खुशियों की दीपावली है।
झूठ के इन ऊँचे किलों को, सच से हम गिराएंगे,
नौटंकी के इस राज को, अब जड़ से हम मिटाएंगे।
जागो ऐ देशवासियों! ये छलावा अब पहचानो,
बहरूपियों के इस शासन को, अब तो तुम जानो।
ये लड़ाई कुर्सी की नहीं, ये लड़ाई सम्मान की है,
झूठ के खिलाफ खड़े, इस हिन्दुस्तान की है।
स्वरचित
कुंवर प्रताप यादवेंद्र सिंह यादव चंद्रवंशी उर्फ टाईगर भईया राष्ट्रीय अध्यक्ष वसुधैव कुटुंबकम्