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मजदूर एकता जिंदाबाद रि-टेंडर में देरी 70 से अधिक मजदूर बेरोजगार, UCIL को सौंपा गया ज्ञापन — 5 मई से हड़ताल की चेतावनी

झारखंड के जादूगोड़ा और नरवा पहाड़ क्षेत्र में ठेका मजदूरों की समस्या एक बार फिर गंभीर रूप लेती नजर आ रही है। Uranium Corporation of India Limited (यूसीआईएल) के अंतर्गत कार्यरत ठेका मजदूरों ने रोजगार की मांग को लेकर आंदोलन का रुख अपना लिया है।

सोमवार को झारखंड ठेका मजदूर यूनियन के बैनर तले मजदूरों ने यूसीआईएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया।

क्या है पूरा मामला?

ज्ञापन में बताया गया कि 28 मार्च 2025 को अनुमंडल पदाधिकारी, धालभूम, जमशेदपुर के कार्यालय में त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी। इस बैठक में यह सहमति बनी थी कि रि-टेंडर में देरी के कारण बेरोजगार हुए ठेका मजदूरों को तत्काल काम दिया जाएगा।

लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस समझौते को लागू नहीं किया गया।

किन कार्यों पर पड़ा असर?

यूसीआईएल के नरवा पहाड़ माइंस के अंतर्गत कई ठेका इकाइयों की टेंडर अवधि समाप्त हो चुकी है, जिनमें शामिल हैं—

कैंटीन सेवा

वाहन पड़ाव (पार्किंग)

वस्त्र साफ-सफाई

कॉलोनी में कीटनाशक छिड़काव

इन सभी कार्यों के रि-टेंडर में भारी देरी के कारण 70 से अधिक मजदूर पिछले 3 महीनों से बेरोजगार बैठे हैं।

आर्थिक संकट से जूझ रहे मजदूर

यूनियन का कहना है कि प्रभावित मजदूरों में अधिकांश विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों के सदस्य हैं। रोजगार छिन जाने के कारण ये परिवार गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं।

साथ ही, ठेका श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम की धारा 21(4) का हवाला देते हुए यूनियन ने कहा कि मुख्य नियोक्ता होने के नाते यूसीआईएल मजदूरों के बकाया वेतन और गुजारा भत्ता देने के लिए जिम्मेदार है।

5 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 5 मई 2026 से नरवा पहाड़ माइंस में कार्यरत सभी ठेका मजदूर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

इस संभावित हड़ताल से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

कौन-कौन रहे उपस्थित?

ज्ञापन सौंपने के दौरान यूनियन के अध्यक्ष सुधीर सोरेन और महासचिव विद्यासागर दास के साथ कई प्रमुख सदस्य मौजूद रहे, जिनमें विशु बास्के, सुशील भूमिज, वर्षा हाँसदा, धनंजय दास, अरुण नायक, भीमसेन दास, वीरेंद्र मोदक, धरणीधर नायक, रणबीर नायक, पृथ्वी टुडू, रंजीत कुमार सीट, शंकर नायक, समीर नाथ, रामकृष्ण गोप, गौरांग दास, समीर दास, शंकर सोरेन सहित दर्जनों मजदूर शामिल थे।

निष्कर्ष

रि-टेंडर प्रक्रिया में देरी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। अब सबकी नजर यूसीआईएल प्रबंधन पर टिकी है कि वह मजदूरों की मांगों पर कितना जल्द और प्रभावी निर्णय लेता है, ताकि संभावित हड़ताल को टाला जा सके।

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