पूरा जमशेदपुर टाटा लोहा नगरी में सफाई व्यवस्था ठप एक फैसले ने बढ़ाई मुश्किलें, जिम्मेदारी पर उठे सवाल
जमशेदपुर (मानगो)
एक प्रशासनिक निर्णय ने पूरे मानगो क्षेत्र की सफाई व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। जिस एजेंसी के माध्यम से अब तक डोर-टू-डोर कचरा उठाव का काम किया जा रहा था, उसे अचानक हटाने के बाद हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह फैसला बिना पर्याप्त तैयारी और वैकल्पिक व्यवस्था के लिया गया, जिसका खामियाजा अब आम जनता भुगत रही है।
हर गली में कचरे का ढेर, बदबू से बेहाल लोग
मानगो की सड़कों, गलियों और मोहल्लों में इन दिनों कचरे के ढेर साफ देखे जा सकते हैं। कई जगहों पर नालियां जाम हो चुकी हैं, जिससे बदबू और गंदगी का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि पहले जहां नियमित रूप से कचरा उठाव होता था, अब वहां कई दिनों तक कचरा जमा रह रहा है।
प्रशासन का दावा बनाम जमीनी हकीकत
उपनगर आयुक्त कृष्ण कुमार का कहना है कि अब नगर निगम खुद डोर-टू-डोर कचरा उठाव करेगा। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। न तो पर्याप्त वाहन दिख रहे हैं और न ही सफाई कर्मियों की सक्रियता पहले जैसी है।
सवालों के घेरे में नगर निकाय की कार्यशैली
स्थानीय लोगों का सवाल है कि अगर पुरानी एजेंसी का काम संतोषजनक नहीं था, तो इतने महीनों तक प्रशासन क्या कर रहा था? क्या निगरानी नहीं हो रही थी, या फिर सिर्फ कागजों में ही सफाई दिखाई जा रही थी?
“मानगो कोई प्रयोगशाला नहीं” — जनता का गुस्सा
निवासियों का कहना है कि मानगो कोई प्रयोगशाला नहीं है, जहां ट्रायल एंड एरर के आधार पर फैसले लिए जाएं। सफाई एक बुनियादी आवश्यकता है, जो हर दिन और हर घर के लिए जरूरी है।
बीमारी फैलने का खतरा बढ़ा
गंदगी और कचरे के ढेर से बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय चिकित्सकों का मानना है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमण फैल सकते हैं।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है?
क्या यह मेयर की नीतिगत चूक है या उपनगर आयुक्त की प्रशासनिक लापरवाही?
जनता के सवाल:
कचरा उठाव की व्यवस्था कब और कैसे सुधरेगी?
बदबू और गंदगी से फैलने वाली बीमारियों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या प्रशासन अपनी गलती स्वीकार करेगा?
निष्कर्ष
मानगो की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि बिना ठोस योजना के लिए गए फैसले किस तरह आम जनता की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। अब जरूरत है त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की, ताकि लोगों को राहत मिल सके और शहर को फिर से साफ-सुथरा बनाया जा सके।