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शव यात्रा में जाने के प्रोटोकॉल, जिस का आज की आधुनिक पिढी को ज्ञान होना चाहिए,

*मरघट शव यात्रा में जाने के प्रोटोकॉल व्यक्ति पढ़ लिखकर आधुनिक परिपेक्ष में पुरातन सभ्यता भूल गया* शव यात्रा के दौरान मरघट जाने के कुछ नियम होते हैं, आज लोगों मरघट मे जाकर आपसी मजाक,व्यापार, परिवार और एक दूसरे की निंदा की बातें करने में भी परहेज नहीं करते, ऐसा करना आपके ऊपर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है 1-जब भी मरघट जाना हो तो किसी को फोन पर या रास्ते में यह नहीं कहना चाहिए कि मैं शमशान जा रहा हूं, शमशान घाट तो व्यक्ति मरणोपरांत ही जाता है कहना चाहिए कि मैं मिट्टी हेतु जा रहा हूं,या अंतिम यात्रा में जा रहा हूं। 2-श्मशान घाट से वापसी आते समय किसी से यह नहीं कहना चाहिए कि आओ चले क्या, ऐसे कहने से श्मशान घाट में अतृप्त आत्माएं को आप अपने साथ चलने का निमंत्रण देते हैं। 3-श्मशान घाट में कभी किसी को नाम से नहीं बुलाना चाहिए ऐसा करने पर उस नाम की आत्माएं आपके संपर्क में आ सकती हैं, 4-श्मशान घाट से चलते समय पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए, ऐसा करने पर आत्मा को लगता है कि आप उन्हें पलट कर देख कर अपने साथ आने का मोन निमंत्रण दे रहे हैं‌। 5-पहले लोग मरघट से निकलते समय छोटे कंकर पीछे की ओर फेंकते थे, यह संकेत होता था यदि कोई नेगेटिव एनर्जी आपके पीछे आपके साथ आ रही है तो उनका विरोध करना, कड़वा नीम खाने का मतलब गलत आत्माओं को यह बताना होता है कि मेरे मुंह में आपके प्रति कड़वाहट है आप वहीं रहो। 6- मरघट में कभी खुले में शोच नहीं जाना चाहिए, 7-मरघट में नीम से अलग किसी वनस्पति, फूल पत्ती को नहीं तोड़ना चाहिए, हो सकता है वह किसी आत्मा का बसेरा हो, 8-मरघट में सदा भगवान की चर्चा ही होती थी, मरघट में कभी व्यापार, नौकरी, पारिवारिक बातें नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर उस व्यापार, नौकरी से संबंधित आत्माएं आपकी ओर आकर्षित होने लगती है, उन्हें लगता है कि आप उन्हीं के के क्षेत्र के व्यक्ति हैं, और आपके पेशे को भविष्य में ये प्रभावित कर सकती हैं। 9- मरघट वाली जगह कभी भी पान-पुडिया तंबाकू ,सिगरेट नहीं पीनी चाहिए, ऐसे करनसे इस तरह के व्यसन करने वाली नेगेटिव एनर्जी आपके संपर्क आकर इन तामसिक पदार्थ का भोग करेगी। *अवतोष शर्मा पैरानॉर्मल विश्लेषक*

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