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किसान जवाब तलाशता वेयरहाउस सिस्टम पर गहराता संदेह

मिट्टी का मापदंड गायब, सिस्टम पर गहराता संदेह
फसल फेल होने के कारण अस्पष्ट, सर्वे प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल,किसान बोला नियम नहीं, मनमानी चल रही है
नर्मदापुरम जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में वेयरहाउस व्यवस्था को लेकर किसानों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। किसान अपनी उपज लेकर वेयरहाउस पहुंचते हैं, लेकिन वहां उन्हें जिस तरह की प्रक्रिया और परिणामों का सामना करना पड़ रहा है, उसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसानों का कहना है कि फसल जमा करने की प्रक्रिया की शुरुआत “स्लाइड बुक” से होती है, जो समय पर नहीं बन पाती। कई बार उन्हें दिनों तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। इसके बाद जब फसल की गुणवत्ता जांच की जाती है, तो अक्सर “मिट्टी” या “नमी” का हवाला देकर उपज को अस्वीकृत कर दिया जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मिट्टी या नमी का तय मापदंड क्या है। किसानों का आरोप है कि उन्हें यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया जाता कि उनकी फसल किस आधार पर फेल की गई। कोई लिखित रिपोर्ट या पारदर्शी प्रक्रिया सामने नहीं आती, जिससे संदेह और गहरा हो जाता है।
किसानों का यह भी कहना है कि अलग-अलग वेयरहाउस में अलग-अलग तरीके से जांच की जाती है। कहीं मामूली कारणों पर फसल खारिज कर दी जाती है, तो कहीं उसी स्तर की फसल को स्वीकार कर लिया जाता है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या नियम सभी के लिए समान हैं या फिर उनका पालन अलग-अलग तरीके से किया जा रहा है।
इन परिस्थितियों में किसान खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। वेयरहाउस में फसल जमा नहीं हो पाने के कारण उन्हें अपनी उपज मंडी में व्यापारियों को कम दाम पर बेचनी पड़ रही है। कई मामलों में किसान अपनी उपज का पूरा मूल्य नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि वेयरहाउस में फसल जांच के लिए स्पष्ट और सार्वजनिक मापदंड तय किए जाएं। साथ ही सर्वे प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और प्रत्येक किसान को उसकी फसल से संबंधित जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी प्रकार की मनमानी पर रोक लगाई जा सके।
मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नियम स्पष्ट नहीं होंगे और प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तो किसानों का भरोसा इस व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा।

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