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बिंदी-तिलक विवाद में @Lenskart को बड़ा झटका, 4500 करोड़ की वैल्यू घटी

मुंबई देश की प्रमुख आईवियर कंपनी Lenskart हाल ही में एक बड़े विवाद में घिर गई, जिसके चलते उसे बाजार में भारी नुकसान उठाना पड़ा। सोशल मीडिया पर BoycottLenskart ट्रेंड होने के बाद कंपनी की मार्केwxट वैल्यू में करीब 4500 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत कंपनी के एक कथित पुराने “स्टाइल गाइड” दस्तावेज से हुई, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस दस्तावेज में कर्मचारियों के लिए बिंदी, तिलक और कलावा जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों पर रोक की बात कही गई थी, जबकि हिजाब को अनुमति दिए जाने का दावा किया गया।

इस कथित भेदभावपूर्ण नीति को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों में नाराज़गी बढ़ गई और देखते ही देखते BoycottLenskart ट्रेंड करने लगा। बड़ी संख्या में यूजर्स ने कंपनी पर धार्मिक असमानता का आरोप लगाया।

शेयर बाजार पर असर

विवाद का सीधा असर कंपनी की बाजार स्थिति पर पड़ा।

कंपनी की वैल्यू 92,872 करोड़ रुपये से घटकर 88,331 करोड़ रुपये रह गई।

शेयर में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई।

यह गिरावट दर्शाती है कि सोशल मीडिया पर उठे मुद्दों का कॉर्पोरेट सेक्टर पर कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

@CEO Peyush Bansal की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के सीईओ @Peyush Bansal ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा— “वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है और इससे गलतफहमी पैदा हुई है। हमारी वर्तमान नीति में सभी धर्मों के प्रतीकों की अनुमति है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी की नई गाइडलाइन में

बिंदी
तिलक
मंगलसूत्र
हिजाब
पगड़ी

सभी को समान रूप से अनुमति दी गई है।

कंपनी ने मांगी माफी

विवाद को शांत करने के लिए Lenskart ने आधिकारिक रूप से माफी भी मांगी और नई गाइडलाइन जारी कर दी। कंपनी ने कहा कि वह सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान करती है और भविष्य में ऐसी गलतफहमी से बचने का प्रयास करेगी।

सोशल मीडिया की ताकत फिर साबित

यह पूरा मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल दौर में सोशल मीडिया कितना प्रभावशाली हो चुका है। एक वायरल डॉक्यूमेंट ने न केवल देशभर में बहस छेड़ दी, बल्कि एक बड़ी यूनिकॉर्न कंपनी को भी अपनी नीति स्पष्ट करने और माफी मांगने पर मजबूर कर दिया।

निष्कर्ष
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता बेहद अहम है। कंपनियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपनी नीतियों में पारदर्शिता रखें और सभी समुदायों का समान सम्मान सुनिश्चित करें, अन्यथा उन्हें आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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