सरंडा में नक्सलियों की घेराबंदी, इनामी नक्सली नेता बीमार—इलाज पर संकट
मनोहरपुर/सरंडा: सरंडा जंगल के लगभग 21 किलोमीटर के दायरे में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की कड़ी घेराबंदी कर दी है। इस अभियान का असर अब नक्सली संगठन पर साफ दिखने लगा है। एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली नेता मिसिर बेसरा की तबीयत लगातार बिगड़ रही है, जबकि दवाइयों की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने से इलाज पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने नक्सलियों की सप्लाई लाइन को काट दिया है। राशन और दवाइयों की कमी के कारण संगठन के भीतर परेशानी बढ़ती जा रही है। बताया जा रहा है कि मिसिर बेसरा के साथ मौजूद चिकित्सक के पास जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म हो चुका है, जिससे उसकी हालत और नाजुक होती जा रही है।
सुरक्षा बलों की सख्ती से बढ़ी मुश्किलें
सुरक्षा एजेंसियों ने हाट-बाजारों में कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। स्थानीय व्यापारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या असामान्य खरीदारी की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। विशेष रूप से अधिक मात्रा में चावल या अन्य जरूरी सामान खरीदने वालों पर नजर रखी जा रही है।
रणनीति साफ—सरेंडर या कार्रवाई
अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई नक्सलियों को सरेंडर के लिए मजबूर करने की रणनीति का हिस्सा है। साफ संदेश दिया गया है कि या तो वे मुख्यधारा में लौटें, अन्यथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई जारी रहेगी। वर्तमान में प्रभावित इलाकों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
राशन के लिए ग्रामीणों से गुहार
जानकारी के मुताबिक, घेराबंदी में फंसे करीब 50 से अधिक नक्सली अब छोटे-छोटे समूहों में बंटकर ग्रामीणों से राशन की मांग कर रहे हैं। हालांकि, सुरक्षा सख्ती के कारण ग्रामीण भी सीमित मात्रा में ही सामान खरीद पा रहे हैं, जिससे नक्सलियों को पर्याप्त खाद्य सामग्री नहीं मिल पा रही है।
बाजारों में भी दिखा असर
हाट-बाजारों में चावल की खपत में कमी दर्ज की गई है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार खरीदारी कम हुई है। प्रशासन की सख्ती के कारण हर खरीद पर नजर रखी जा रही है, जिससे अवैध सप्लाई पर रोक लगी है।
इस पूरे अभियान के बीच साफ है कि सुरक्षा बलों की रणनीति नक्सलियों पर दबाव बनाने में असरदार साबित हो रही है, और आने वाले दिनों में इसका और बड़ा असर देखने को मिल सकता है।