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ब्राह्मणों को तमिलनाडु विधानसभा में भाजपा समेत किसी पार्टी ने टिकट नहीं दिया। मैं निजी तौर पर इसका स्वागत करता हूं। ब्राह्मणों को सत्ता का मोह छोड़ना

ब्राह्मणों को तमिलनाडु विधानसभा में भाजपा समेत किसी पार्टी ने टिकट नहीं दिया। मैं निजी तौर पर इसका स्वागत करता हूं। ब्राह्मणों को सत्ता का मोह छोड़ना ही होगा। कोई ब्राह्मण सांसद या विधायक बन भी जाए तो उससे सरोकार मत रखिए। तमिलनाडु में ब्राह्मणों का विरोध पचास सालों से हो रहा है। इसका परिणाम है कि अमेरिका के सिलिकान वैली में 70 प्रतिशत कंपनियों के सीईओ और कर्मचारी दक्षिण भारत के ब्राह्मण हैं। अब उत्तर भारत में भी ब्राह्मण अछूत बनते जा रहे हैं। इसी को अपनी ताकत बनाइए। ब्राह्मणों को व्यापार और नवाचार अपनाने की आवश्यकता है। तकनीकी के नए युग में वैश्विक समुदाय के तौर पर ब्राह्मणों की स्वीकार्यता बढ़ी है भले अपने ही देश में उन्हें किनारे कर दिया जा रहा है। एक कश्मीरी ब्राह्मण आदित्य धर ने 75 साल के बालीवुड के पूरे नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया। कानपुर के शुक्ला जी अपनी क्षमता से अंतरिक्ष में सप्ताह भर बिता आए, गले में रूद्राक्ष और कांधे पर जनेऊ जीरो ग्रैविटी पर भी शोभित रहा। ब्राह्मणों को अपने आइकान किसी राजनेता या अधिकारी को बनाने की जगह किसी व्यापारी या ग्लोबल बिज़नेस लीडर को बनाना होगा। देश ब्राह्मणों के बहिष्कार के मूड में है जबकि विश्व आपको गले लगाने की तैयारी में है।

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