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बिजली विभाग के विवाद में नया मोड़ भाकियू जिलाध्यक्ष को फसाने के लिए अज्ञात व्यक्ति ने फर्जी तरीके से भरा राजस्व निर्धारण बिल

बिजली महकमे में 'फर्जीवाड़े' का बड़ा खेल, क्या रसूखदारों को बचाने के लिए रची गई 'Impersonation' की साजिश?

*मुजफ्फरनगर।* जनपद के विद्युत विभाग में भ्रष्टाचार और साजिश का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला थाना सिविल लाइन क्षेत्र का है, जहाँ एक भाकियू जिलाध्यक्ष को कानूनी रूप से 'बाध्य' करने और मजिस्ट्रीयल जांच को प्रभावित करने के लिए किसी अज्ञात व्यक्ति ने जिलाध्यक्ष के नाम से 'गुपचुप' तरीके से लाखों का बकाया धन जमा कर दिया।
*विवाद की जड़:* जेई पर आरोप पत्र और 'काल्पनिक' राजस्व निर्धारण
पीड़ित कुंगर पट्टी सुजड़ू के रहने वाले समाजवादी पार्टी के नेता और भारतीय किसान यूनियन (एकता) के जिलाध्यक्ष शुजाअत राणा ने बताया कि तत्कालीन जेई गौरव कुमार ने सुजड़ू में स्थित उनके पुशतैनी आवास की द्वेषवश उनके विरुद्ध एक फर्जी चेकिंग रिपोर्ट बनाकर अवैध राजस्व निर्धारण (Revenue Assessment) थोप दिया था।सपा नेता शुजाअत राणा की लड़ाई रंग लाई और विभागीय जांच में जेई के खिलाफ दोष सिद्ध होने पर 'आरोप पत्र' (Charge Sheet) जारी किया गया। मामला फिलहाल अधिशासी अभियंता (नगरी विद्युत वितरण खंड-तृतीय) के समक्ष विचाराधीन है।

*साजिश का 'मास्टर स्ट्रोक': चुपके से भरा गया बिल*

हैरानी की बात तब हुई जब 13 अप्रैल 2026 को शुजाअत राणा अपना घरेलू बिल जमा करने बिजली विभाग दफ्तर पहुंचे। वहां पता चला कि किसी 'अदृश्य' मददगार ने 'बिजली बिल राहत योजना' की आड़ में उनका विवादित राजस्व निर्धारण पहले ही जमा कर दिया है।
*कानूनी पेच: क्यों भरा गया यह बिल?*
यह कोई समाजसेवा नहीं,बल्कि एक गहरी आपराधिक साजिश प्रतीत होती है। शुजाअत राणा का आरोप है कि:साक्ष्य मिटाने की कोशिश:
कथित राजस्व निर्धारण जमा होने का मतलब है कि शुजाअत ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। इससे दोषी जेई गौरव कुमार को बचाने का रास्ता साफ हो सकता है।
*प्रतिरूपण (Impersonation): किसी दूसरे के नाम का इस्तेमाल कर भुगतान करना सीधे तौर पर धोखाधड़ी है।*
नफा-नाजायज: षडयंत्रकारी चाहते हैं कि शुजाअत राणा इस भुगतान को स्वीकार कर ले विभाग के खिलाफ चल रही शिकायत की मजिस्ट्रीयल जांच कमजोर पड़ जाए।
*पुलिस कप्तान की चौखट पर पीड़ित:*
शुजाअत राणा ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तहरीर देकर अज्ञात' व्यक्ति की पहचान करने और उसे जेल भेजने की मांग की है।
*उन्होंने विधुत विभाग से भी स्पष्ट कहा है कि* इस धनराशि को 'Under Protest' माना जाए, क्योंकि उन्होंने यह पैसा जमा नहीं किया है।
*बड़ा सवाल:* बिजली घर के सर्वर और रिकॉर्ड के बीच आखिर वो कौन 'छवि चोर' है, जो सरकारी प्रक्रिया को निजी स्वार्थ के लिए मोड़ रहा है? क्या पुलिस सीसीटीवी और भुगतान के माध्यम (Cheque/Online/Cash) के जरिए उस 'चेहरे' को बेनकाब करेगी?

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