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ज्वालामुखी मेला सेवा समिति के गठन का दावा झूठा

ज्वालामुखी मेला सेवा समिति के गठन का दावा झूठा

जागरण शक्तिनगर। शक्तिपीठ माँ ज्वालामुखी मंदिर पर लगने वाले पौराणिक एवं पारंपरिक मेले को लेकर एक महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया है। मंदिर से जुड़े प्राधिकृत पुजारी एवं तीर्थ पुरोहितों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसारश्री ज्वालामुखी मेला सेवा समितिश् के गठन का दावा पूरी तरह निराधार और भ्रामक है। इस संबंध में 16 अप्रैल को पत्रांक. 11/26 के माध्यम से एसडीएम कार्यालय के जन सूचना अधिकारी तहसीलदार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि बीते 5 वर्षों में ज्वालामुखी मेले के लिए किसी भी प्रकार की कोई आधिकारिक समिति गठित नहीं की गई है। जिला प्रशासन सोनभद्र के अनुसार यह मेला प्राचीन परंपरा के अनुसार स्वतः आयोजित होता है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन केवल कानून. व्यवस्था बनाए रखने का कार्य करता है जबकि मेला आयोजन में किसी संस्था या समिति की कोई भूमिका नहीं होती। इस खुलासे के बाद स्वयंभू मेला समिति के अध्यक्ष और तथाकथित समाजसेवियों के दावों की सच्चाई सामने आ गई है। आरोप है कि कुछ लोग समिति के नाम पर समाज को

भ्रमित कर निजी लाभ लेने का प्रयास कर रहे थे। मंदिर के प्राधिकृत पुजारी पं. हेमंत मिश्रा ने बताया कि ज्वालामुखी मेला अनादिकाल से परंपरागत रूप से आयोजित होता रहा है। वर्ष 2019 से पूर्व मेला भूमि की नीलामी राजस्व विभाग एवं ग्राम सभा द्वारा संयुक्त रूप से की जाती थी। इस प्रक्रिया को उच्च न्यायालय इलाहाबाद में चुनौती दी गई थीए जिसके बाद न्यायालय द्वारा नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई। इसके बाद कुछ तथाकथित लोगों द्वारा स्वयं को समिति का अध्यक्ष घोषित कर मेले में हस्तक्षेप किया जाने लगाए जिससे व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं। वर्तमान में मेले में पेयजल शौचालय प्रकाश व्यवस्था पार्किंग और वैकल्पिक मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग तथाकथित समाजसेवा के नाम पर सम्मान समारोह जैसे आयोजन कर समाज को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। मंदिर पक्ष ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की भ्रामक गतिविधियों एवं अव्यवस्थाओं के विरुद्ध न्यायालय के माध्यम से उचित कार्रवाई की जाएगी।

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