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असम केस में पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की


कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम में दर्ज एक आपराधिक मामले के संबंध में गुवाहाटी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए अग्रिम जमानत (एंटिसिपेटरी बेल) के लिए औपचारिक याचिका दाखिल की है। यह मामला असम क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते राजनीतिक और कानूनी हलकों में इस प्रकरण पर विशेष नजर बनी हुई है।आधिकारिक ई-कोर्ट्स रिकॉर्ड के अनुसार, यह मामला एबी संख्या 804/2026 (सीएनआर: GAHC01- 007614-2026) के रूप में पंजीकृत किया गया है। याचिका 20 अप्रैल 2026 को दाखिल की गई थी और इसे गुवाहाटी उच्च न्यायालय की आपराधिक पीठ के एकल न्यायाधीश के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। पवन खेड़ा की ओर से यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 482 के तहत दाखिल की गई है, जिसमें गिरफ्तारी से पूर्व सुरक्षा (प्रि-अरेस्ट प्रोटेक्शन) की मांग की गई है। यह याचिका असम के कामरूप (मेट्रो) जिले के क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 4/2026 के संदर्भ में दायर की गई है। वर्तमान में यह मामला प्रारंभिक चरण में है और अभी तक सुनवाई की कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है। हालांकि, अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, याचिका से संबंधित सभी प्रक्रियात्मक आपत्तियों का समाधान कर लिया गया है, जिससे अब मामले को विधिवत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. एन. चौधरी सहित अधिवक्ताओं की एक टीम पैरवी कर रही है, जबकि असम राज्य की ओर से लोक अभियोजक (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) अदालत में पक्ष रख रहे हैं। इस घटनाक्रम ने पहले से ही संवेदनशील बने इस मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अग्रिम जमानत पर अदालत का निर्णय इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही, इस मामले के राजनीतिक प्रभाव भी व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकते हैं। अब सभी की निगाहें गुवाहाटी उच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत मिलती है या नहीं।

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