लातेहार: भीषण गर्मी में प्यास बुझाने वाले चापाकल बदहाल, कचरे और मिट्टी में दबे सार्वजनिक हैंडपंप
लातेहार: जिले में गर्मी का पारा चढ़ते ही पानी की किल्लत गहराने लगी है। ऐसे समय में जब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोग पानी के लिए पूरी तरह हैंडपंपों (चापाकल) पर निर्भर हैं, प्रशासन की अनदेखी के कारण दर्जनों सार्वजनिक चापाकल मरम्मत के अभाव में दम तोड़ रहे हैं।
कचरे के ढेर में तब्दील हुए पानी के स्रोत
दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह सामने आया है कि शहर के कई मुख्य स्थानों पर लगे हैंडपंप या तो मिट्टी में दब गए हैं या उनके चारों ओर कचरे का अंबार लगा है। स्थिति इतनी खराब है कि लोग इन हैंडपंपों का पानी पीने से भी परहेज कर रहे हैं, जिससे बीमारी फैलने का डर बना हुआ है।
प्रमुख प्रभावित क्षेत्र:
चंदवा बस स्टैंड: जिला परिषद बस स्टैंड, जहाँ से प्रतिदिन हजारों यात्री गुजरते हैं और विभाग को लाखों का राजस्व मिलता है, वहां का एकमात्र हैंडपंप और सोलर जलमीनार कई दिनों से खराब पड़ी है। यात्री बोतल बंद पानी खरीदने को मजबूर हैं।
लातेहार शहर (डुरूआ स्टेशन): नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत 80 मीटर के दायरे में लगे तीन हैंडपंपों में से दो खराब हैं। श्री सोमेश्वर शिव मंदिर और सामुदायिक शौचालय के पास लगे ये हैंडपंप शो पीस बनकर रह गए हैं।
बरवाडीह: प्रखंड मुख्यालय स्थित बस स्टैंड परिसर में लगा हैंडपंप और जलमीनार पिछले डेढ़ साल से खराब है। पास में ही 'मुख्यमंत्री दाल-भात योजना' केंद्र भी संचालित है, जहाँ आने वाले सैकड़ों लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।
आंकड़ों की ज़ुबानी:
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 12,000 और शहरी क्षेत्रों में 500 से अधिक हैंडपंप लगाए गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में ग्रामीण क्षेत्रों के 1,500 और शहरी क्षेत्रों के 8-10 हैंडपंप खराब बताए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर नजर आती है।
अधिकारियों का पक्ष:
"लातेहार शहर के किसी भी वार्ड में हैंडपंप खराब होने की सूचना विभाग के पास नहीं है। जैसे ही जानकारी मिलती है, त्वरित कार्रवाई कर उसे दुरुस्त किया जाता है।"
— अमित कुमार, जेई, नगर पंचायत लातेहार
"गर्मी में पेयजल संकट से निपटने के लिए विभाग सक्रिय है। जहाँ भी खराबी की सूचना मिल रही है, वहां तत्काल मरम्मत कराई जा रही है।"
— दीपक कुमार महतो, ईई, पेयजल विभाग, लातेहार
निष्कर्ष: एक तरफ विभाग मुस्तैदी का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जल स्त्रोतों के पास गंदगी और तकनीकी खराबी प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है। यदि समय रहते इन चापाकलों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।