जयपुर पुलिस ने मोहम्मद दीन के घर में दाखिल होकर एक जोड़े की तलाश में जो सीन क्रिएट किया, वो शर्मनाक और अमानवीय है।
जयपुर पुलिस ने मोहम्मद दीन के घर में दाखिल होकर एक जोड़े की तलाश में जो सीन क्रिएट किया, वो शर्मनाक और अमानवीय है।
नहा रही मुस्लिम लड़की को बाथरूम से घसीटकर बाहर निकाला गया, परिवार के सदस्यों को बुरी तरह पीटा गया। फिजा अंसारी की मां घायल हो गईं, उनके दो भाइयों और भाभी को हिरासत में ले लिया गया।
ये पुलिसिया अत्याचार है या फिर किसी की इज्जत और गरिमा पर हमला? महिलाओं की इज्जत की रक्षा करने वाले पुलिस वाले खुद ही घर में घुसकर इस कदर बर्बरता पर उतर आएं, ये सोचकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है – ये अच्छा कदम है, लेकिन सवाल ये है कि ऐसी घटनाओं पर सख्त सजा और जवाबदेही कब तक सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी?
क्या पुलिस को लगता है कि किसी भी बहाने घर में घुसकर महिलाओं की पर्सनल स्पेस और सम्मान को तार-तार करना उनकी ड्यूटी का हिस्सा है? ये न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानवाधिकारों का घोर हनन है।
जवाबदेही तय हो, दोषियों पर सख्त एक्शन लिया जाए, वरना ऐसी घटनाएं आम होती जाएंगी। इंसाफ की मांग!