नेपाल में भारत से आने वाले सामान पर कस्टम फैसले पर बवाल, मधेशी क्षेत्रों में विरोध तेज
काठमांडू, 19 अप्रैल नेपाल सरकार के उस फैसले को लेकर सियासी और जनस्तर पर विरोध तेज हो गया है, जिसमें भारत से 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान के आयात पर अनिवार्य सीमा शुल्क (कस्टम) लगाने का प्रावधान किया गया है। सत्ताधारी दल के सांसदों ने ही इस निर्णय पर असंतोष जताया है और इसे आम जनता के लिए परेशानी बढ़ाने वाला कदम बताया है।
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के सांसदों ने कहा कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर सीमावर्ती इलाकों के लोगों पर पड़ रहा है, जहां भारत-नेपाल के बीच रोजमर्रा के सामान का आदान-प्रदान आम बात है। इस मुद्दे को लेकर रविवार को आरएसपी के कुछ सांसदों ने गृह मंत्री सुदन किराती से मुलाकात कर फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।
मधेश से सांसद तपेश्वर यादव ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच “रोटी-बेटी” का ऐतिहासिक रिश्ता रहा है, लेकिन इस तरह के सख्त नियम आम लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तस्करी पर रोक जरूरी है, लेकिन व्यक्तिगत उपयोग के लिए सामान लाने वाले नागरिकों को परेशान करना उचित नहीं है।
सिराहा-2 से सांसद शिवशंकर यादव ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों को हो रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तस्करी रोकने के लिए सख्ती जरूरी है, लेकिन हर क्षेत्र में एक जैसा नियम लागू करने से आम नागरिक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से नीति में लचीलापन लाने और आम लोगों की सुविधा को प्राथमिकता देने की मांग की।
इस बीच, काठमांडू के मैतीघर में मधेशी युवाओं के एक समूह ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह कदम मधेशी क्षेत्रों को कमजोर करने की साजिश है और सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।
सांसदों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सीमा पर निगरानी कड़ी होनी चाहिए और नशीले पदार्थों व अवैध धन के प्रवाह पर सख्त नियंत्रण जरूरी है, लेकिन घरेलू उपयोग के सामान पर राहत दी जानी चाहिए ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।