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हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता टकराव: अमेरिका-ईरान आमने-सामने, वैश्विक तनाव गहराया

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और निकट भविष्य में समाधान की कोई स्पष्ट संभावना नजर नहीं आ रही। जैसे-जैसे दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत करीब आ रही है, अविश्वास और मतभेद और गहराते दिख रहे हैं।

ईरान ने अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों की घेराबंदी खत्म नहीं करता और अपनी सेना वापस नहीं बुलाता, तब तक जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने का सवाल ही नहीं उठता। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह ने अल जजीरा और सीबीएस न्यूज के हवाले से कहा कि अमेरिका के साथ आमने-सामने बातचीत की अगली तारीख अभी तय नहीं हुई है। उन्होंने वाशिंगटन के रुख को ‘जिद्दी’ बताते हुए आलोचना की।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक कोई समझौता नहीं होता, तब तक ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। उनका कहना है कि अमेरिका किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा।

ईरान का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर ही किसी समझौते को स्वीकार करेगा और अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने भी माना कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अंतिम समझौता अभी दूर है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से नियंत्रण स्थापित कर लिया है और चेतावनी दी है कि अमेरिकी प्रतिबंध जारी रहने तक इस मार्ग से पारगमन बंद रहेगा। हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटिश सेना ने एक टैंकर पर ईरानी गनबोट्स द्वारा फायरिंग की पुष्टि की है। भारत ने भी कहा है कि उसके दो जहाजों को हमले का निशाना बनाया गया।

उधर, दक्षिण लेबनान में भी संघर्ष की खबरें सामने आ रही हैं, जहां सैन्य गतिविधियों के दौरान हताहत हुए हैं। फ्रांस समेत कई देशों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है।

कुल मिलाकर, हॉर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर मध्य-पूर्व के अन्य हिस्सों तक बढ़ता यह तनाव वैश्विक शांति और व्यापार दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

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