माँ के लिए शानदार प्रेरणा भरा हुआ संदेश
`माँ का आँचल`
घुटनों से रेंगते-रेंगते,
जब पैरों पर खड़ा हुआ,
तेरी ममता की छांव में,
जाने कब मैं बड़ा हुआ।
काला टीका, दूध की कटोरी,
वो लोरी गाकर सुलाना,
मेरे रोने पर तेरा रो देना,
और हर ज़िद को मुस्कुराकर मानना।
दुनिया की भीड़ में जब,
खुद को तन्हा पाता हूँ,
तेरी दी हुई दुआओं में,
मैं सुकून का दरिया पाता हूँ।
भगवान तो नहीं देखा मैंने,
पर उसकी सूरत देखी है,
हाँ, मैंने अपनी माँ में ही,
जन्नत की मूरत देखी है।
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