खून गाढ़ा होने से ढाई साल में हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक के केस दस गुना बढ़ गए
मुरादाबाद पछिले ढाई साल में, खासकर कोविड की पहली और दूसरी लहर में कोरोनावायरस से संक्रमित हुए लोगों में से एक वर्ग पोस्ट कोविड प्रभावों की जद में आया और उनमें से कुछ का खून गाढ़ा होने की शिकायत भी आने लगी। बड़े अस्पतालों में हार्ट अटैक और बेन स्ट्रोक के मरीजों की स्टडी के बाद डाक्टरों का दावा है कि होटल या रेस्टोरेंट का बाहर का खाना नियमित रूप से खाने से हार्ट अटैक और हृदय रोगों (Heart Diseases) का खतरा काफी बढ़ जाता है। अध्ययन बताते हैं कि जो लोग अक्सर बाहर का खाना खाते हैं, उनमें कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का जोखिम अधिक होता है। बाहर के खाने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ने के प्रमुख कारण:
अत्यधिक नमक (Sodium): रेस्टोरेंट और होटल के खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा नमक का उपयोग किया जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट पर दबाव पड़ता है।
खराब वसा (Unhealthy Fats): होटल के खाने में अक्सर सैचुरेटेड और ट्रांस फैट (जैसे डालडा या बार-बार गर्म किया गया तेल) का उपयोग होता है, जो कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ाता है और धमनियों में ब्लॉकेज का कारण बनता है।
उच्च कैलोरी और शुगर: बाहर के फास्ट फूड और रेस्टोरेंट के भोजन में कैलोरी और चीनी की मात्रा अधिक होती है, जो मोटापा और डायबिटीज का कारण बनती है, और ये दोनों हार्ट अटैक के बड़े कारक हैं।
प्रोसेस्ड फूड: प्रोसेस्ड मीट, फास्ट फूड और फ्राइड फूड में प्रिजर्वेटिव्स होते हैं जो शरीर में सूजन (inflammation) पैदा करते हैं इफेक्ट के तौर पर खून गाढ़ा होने की वजह से हार्ट अटैक और ग्रेन हेमरेज के केस चार गुना तक बढ़ गए हैं। राजधानी के सबसे बड़े अंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट, डीकेएस व निजी अस्पतालों में ढाई साल पहले हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक से आने वाले मरीजों की संख्या दिन में औसत 200-300 रहती थी। अब डीकेएस के ही न्यूरोलॉजी व न्यूरो सर्जरी विभाग में रोज 1200-1300 ऐसे पहुंच रहे हैं, जो पोस्ट कोविड के कारण ब्रेन हेमरेज या पैरालिसिस के शिकार हो गए।
मुरादाबाद कोरोना की एंट्री मार्च 2020 में हुई थी। तब से कोरोना की तीन लहर गुजर चुकी है। इससे स्वस्थ हुए लोग अब नई बीमारी से सीनियर मेडिकल कंसल्टेंट डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा व हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गोयल के अनुसार जब नसें सिकुड़ जाती हैं, तब हार्ट को पंपिंग के लिए ज्यादा काम करना पड़ता है। बेन की नसें भी संकरी होने के कारण ब्रेन हेमरेज व पैरालिसिस का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जो कोरोना से ग्रसित हुए हैं, उन्हें सीबीसी यानी कंपलीट ब्लडकाउंट टेस्ट कराना चाहिए। इससे पता चल जाता है कि उनका खून सामान्य है या गाढ़ा हो गया। जिन्हें कोविड नहीं हुआ, उन पर भी असर जेनेटिक के अलावा जो स्मोकिंग कर रहे हैं और शराब का ज्यादा सेवन कर रहे हैं, उन्हें भी हार्ट व बेन की बीमारी घेर रही है। खून का गाढ़ा होना (High Blood Viscosity) हार्ट अटैक के मामलों में वृद्धि का एक प्रमुख कारण बन गया है, खासकर युवाओं और 40-50 साल के लोगों में। यह समस्या रक्त के प्रवाह को धीमा कर देती है और नसों में थक्के (Clots) बना देती है, जिससे हृदय तक ऑक्सीजन की कमी हो जाती हैन नसें संकरी हो जाती है। इससे हार्ट को खून की पंपिंग के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। इससे हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है।