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आखिर महिला आरक्षण की आड़ में सरकार की क्या मनसा?

इस बीच हमने ग्रामीण लोगों से बिल को लेकर बात की तो लोगों की प्रतिक्रियायें सामने आयी एक किसान नेता बोले कि महिला आरक्षण की आढ़ में सरकार देश की जनता के ऊपर और निकम्मे उल्लुओ को बैठाना चाह रही है जबकि पहले से ही लगभग 543 बेचारे गरीब नेताओं को देश की अमीर मजदूर जनता द्वारा वेतन, गाड़ी, मकान, पानी, बिजली, यात्रा, टोल, टेलीफोन, ऑफिस, पंखा, ac, नौकरचाकर, बॉडी गार्ड, होम गार्ड, बीबी बच्चों को गार्ड, भाइयों को गार्ड, आदि सेकड़ो और अन्य फ्री की सुबिधा दी जा रही है जिनका बोज जनता के कंधो पड़ता ही जा रहा है और अब सरकार उल्लुओ की संख्या 850 करने जा रही है मतलब बोजा दोगुना बढ़ जायेगा महगाई और बढ़ेगी vip कल्चर आम आदमी पर हावी हो जायेगा अभी ये तो केवल सांसदों का डेटा है अभी इसमें राज्य सभा, MLA, MLC आदि vip का डेटा नहीं दिया है उनका अपने हिसाब से जोड़ लो
इस बीच एक माताजी बोली बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकार के पास रुपये नहीं हैं और सांसदों का बोज लाद रहे है इस बीच में एक सज्जन बोले कर्मचारियों को पैंन्शन देने के लिए रुपये नहीं हैं, अशिक्षितों को शिझित बनाने के लिये बेशिक स्कूल बंदकिये जा रहे हैं, और नेताओं जिनमेँ एक सांसद पर हर वर्ष कम से कम पंन्दरह करोड रुपये खर्च करने पडते हैं और सांसद पहले विधायक रहा है और नगर पालिका सदस्य या जिला पंचायत सदस्य रहा है तो सभी की मिलाकर चार चार पैंशन लेरहे हैं फिर भी 543 सांसदोँ की जगह 850 सांसद करने जारहे हैं इतने ही हर पृदेश में विधायक बढाने जा रहे हैं क्या इन्होने देश का झेत्र फल बढालिया है या भारत की सेना की जगह ये सांसद और विधायक देश की सेना में जाकर देश की शीमाओं की रझा करेंगे जो इनके लिये बढा हुआ पैसा किस मद से और कहाँ से आयेगा ये बताया है नारी बंदन करना है तो मौजूदा 543 शीटों में से ही तेतीस या पचास पृतिशत महिलाओं को आरझण देकर अपना नाम रोशन करने में क्या परेशानी है

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