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रिपोर्ट : ​'भाजपा के पतन की शुरुआत' ​


उलुबेड़िया/कोलकाता:
लोकसभा में 'डिलिमिटेशन बिल' (परिसीमन विधेयक) पास न करा पाने को नरेंद्र मोदी के 'पतन की शुरुआत' बताते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने साफ कहा कि संसद के बाद अब बंगाल के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा पूरी तरह धराशायी होगी।

मुख्य आरोप और बयान:

डिलिमिटेशन और महिला बिल: ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि डिलिमिटेशन बिल के साथ 'महिला आरक्षण बिल' को क्यों जोड़ा गया। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, "राष्ट्र के नाम संबोधन का मतलब सिर्फ 'जुमला' है। लोकसभा में हारने से पहले आप बताइए कि आपने माताओं-बहनों का अपमान क्यों किया?" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिला बिल के पीछे परिसीमन और कोयले जैसे मुद्दों को छिपाने की कोशिश कर रही है।

सीटों का गणित: ममता ने दावा किया कि भाजपा सरकार वर्तमान में अल्पसंख्यक है और केवल दो दलों के भरोसे टिकी है। उन्हें डर है कि वर्तमान 543 सीटों पर चुनाव होने पर वे सत्ता में नहीं आएंगे, इसलिए वे सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना चाहते हैं। उनका कहना है कि इसका महिला बिल से कोई लेना-देना नहीं है।

बंगाल का मॉडल: मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा को तृणमूल कांग्रेस (TMC) से सीखना चाहिए। बंगाल में पंचायतों और नगर निकायों में 50% महिला आरक्षण है। लोकसभा में TMC का महिला प्रतिनिधित्व 37% और राज्यसभा में 46% है, जो भाजपा के पास आसपास भी नहीं है।

राजनीतिक साजिश: उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में वोटिंग के दौरान विपक्ष को रोकने की साजिश रची गई। उनके अनुसार, वोटिंग में भाजपा को 298 और विपक्ष को 230 वोट मिले, लेकिन अगर TMC के 8 सांसद और अन्य विपक्षी सांसद वहां मौजूद होते, तो यह अंतर और भी कम होता।

​चुनावी वादे और प्रशासनिक आरोप:
​ममता बनर्जी ने भाजपा की 'लक्ष्मी भंडार' जैसी योजनाओं के बदले 3000 रुपये देने के वादे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा ने दिल्ली और बिहार में भी ऐसे वादे किए थे लेकिन उन्हें निभाया नहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा 'परिवार के लोगों' को ऑब्जर्वर बनाकर भेज रही है और पुलिस को निर्देश दे रही है कि TMC एजेंटों को गांजा केस (नशीले पदार्थों के मामले) में फंसाकर गिरफ्तार किया जाए।

​निष्कर्ष (Conclusion)
​रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि ममता बनर्जी ने डिलिमिटेशन बिल की विफलता को भाजपा की नैतिक और राजनीतिक हार के रूप में पेश किया है। उनके भाषणों का मुख्य सार निम्नलिखित है:

​अस्तित्व की लड़ाई: वे भाजपा को एक "कमजोर सरकार" के रूप में चित्रित कर रही हैं जो बैसाखियों पर टिकी है।

​महिला कार्ड: ममता खुद को महिला अधिकारों की असली रक्षक बताकर भाजपा के महिला आरक्षण बिल को एक चुनावी ढोंग साबित करने की कोशिश कर रही हैं।

बंगाल बनाम केंद्र: वे इस लड़ाई को बंगाल की अस्मिता और दिल्ली की तानाशाही के बीच के संघर्ष के रूप में मोड़ रही हैं, साथ ही आने वाले चुनावों के लिए अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने का प्रयास कर रही हैं।

संक्षेप में, यह रिपोर्ट दर्शाता है कि ममता बनर्जी ने 2024 और उसके बाद के चुनावों के लिए 'डिलिमिटेशन' और 'महिला आरक्षण' को मुख्य मुद्दा बनाकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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