बन्दीपुर का 'सेवा संकल्प': जहाँ चिकित्सा और संवेदना का होता है पावन संगम
ब्यूरो प्रमुख ओमप्रकाश सिंह
आजमगढ़/ अम्बेडकर नगर: आज के दौर में जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ एक बड़े व्यवसाय का रूप ले चुकी हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जनपद में एक ऐसा स्थान भी है जो 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के संकल्प को चरितार्थ कर रहा है। बांदीपुर–चैनपुर मार्ग पर स्थित सीएमएस आई विंग हॉस्पिटल केवल ईंट-पत्थरों से बनी एक इमारत नहीं, बल्कि हज़ारों निर्धन परिवारों की उम्मीदों का केंद्र बन चुका है।
पुण्यतिथि पर सेवा की अनूठी मिसाल
किसी प्रियजन के जाने के बाद उनकी स्मृति को संजोने के कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन डॉ. विनोद कुमार सिंह (वशिष्ठ नारायण सिंह), अरविंद कुमार सिंह और संदीप कुमार सिंह ने एक ऐसी राह चुनी जो समाज के लिए मिसाल बन गई। वर्ष 2013 में अपने पिता स्वर्गीय ओम प्रकाश सिंह के निधन के उपरांत, इन भाइयों ने उनकी पुण्यतिथि (27 नवंबर) को 'सेवा दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय लिया।
हर वर्ष इस दिन एक विशाल निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाता है। इस अभियान की सफलता का प्रमाण यह है कि अब तक 2000 से अधिक ज़रूरतमंदों की आँखों का सफल ऑपरेशन कर उन्हें दृष्टि का उपहार दिया जा चुका है। शिविर में:
निःशुल्क ऑपरेशन और अत्याधुनिक लेंस प्रत्यारोपण।
निशुल्क चश्मा वितरण।
दवाइयों और परामर्श की पूर्ण व्यवस्था।
विशेषज्ञता और समर्पण का मेल
अस्पताल की सफलता में डॉ. सृष्टि का योगदान अत्यंत सराहनीय है। प्रत्येक गुरुवार और रविवार को उनके द्वारा दिया जाने वाला विशेषज्ञ परामर्श और सटीक उपचार क्षेत्र के मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। उनकी चिकित्सकीय कुशलता ने न जाने कितने ही बुझते हुए चिरागों में रोशनी फिर से भरी है।
आधुनिकता और सुरक्षा का समन्वय
बांदीपुर स्थित यह अस्पताल न केवल सेवा भाव, बल्कि अपनी व्यवस्थाओं के लिए भी जाना जाता है।
सुरक्षित वातावरण: पूरा परिसर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है।
साफ-सफाई: मरीजों के लिए स्वच्छ और व्यवस्थित वार्डों की उपलब्धता।
विविधता: अस्पताल से सटा 'बंधन वाटिका' मैरिज हॉल सामाजिक और मांगलिक आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र की सामाजिक सक्रियता को बढ़ाता है।
अरविंद कुमार सिंह: बहुआयामी व्यक्तित्व, निस्वार्थ सेवा
संस्थान के स्तंभों में से एक, अरविंद कुमार सिंह (57 वर्ष), समाजसेवा के क्षेत्र में एक सुपरिचित नाम हैं। एक संवेदनशील कवि और कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उनकी पहचान अस्पताल की चारदीवारी से कहीं आगे तक है। वे न केवल अस्पताल का प्रबंधन देखते हैं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी समाज के प्रति समर्पित हैं:
गरीब कन्याओं के विवाह में आर्थिक संबल प्रदान करना।
जेलों में बंद उन असहाय कैदियों की रिहाई के लिए प्रयास करना जो आर्थिक अभाव के कारण न्याय से वंचित हैं।
सामूहिक प्रयास की शक्ति
इस महान अभियान को भुवनेश्वर प्रसाद मिश्र (अस्पताल संरक्षक) का मार्गदर्शन और सौरभ सिंह व आदित्य मिश्रा जैसे युवाओं का सक्रिय सहयोग प्राप्त है। यह टीम भावना ही है जो इस संस्थान को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचने की शक्ति देती है।
निष्कर्ष
अम्बेडकर नगर का यह सेवा अभियान हमें सिखाता है कि चिकित्सा केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का विस्तार है। बन्दीपुर का यह 'सेवा संकल्प' आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी मशाल है, जो अंधकारमय जीवन में आशा की किरणें बिखेर रही है।